श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के छठवें दिन 524 अर्घ्य समर्पित किए

**आगरा** आज शुंकवार को श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर बेलनगंज में श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शान्ति महायज्ञ के छठवें दिन प्रातः 7:00 बजे से श्री जी का अभिषेक एवं शांतिधारा नित्य नियम पूजन वं विधान प्रारंभ हुआ| इसके बाद पंडित सौरभ जैन शास्त्री के निर्देशन में सभी इंद्र-इंद्रणिया ने 524 अर्घ्य समर्पित किया गया| विधान आचार्य सौरभ जैन ने बताया कि जैन धर्म में गुरु का विशेष महत्व है

अरिहंत प्रभु हमारे तीर्थंकर होने के साथ-साथ हमारे गुरुजी है जिन्होंने हमें जैन धर्म का ज्ञान कराया है| गुरू भगवंत वो प्रसाद होते हैं वे जिसके भाग्य में हो उसे कभी कुछ मांगने की आवश्यकता ही नहीं रहती है| पिता पुत्र का संबंध तो खून का होता है लेकिन गुरु शिष्य का संबंध हृदय का होता है तंरग का होता है| बगैर गुरू ज्ञान प्राप्ति संभव नहीं है हर व्यक्ति की मंजिल जीवन में परमात्मा को पाने की होती है इसके लिए वह अनेक प्रकार से जतन करता है लेकिन गुरु ही यह रास्ता होता है

जो हमें परमात्मा तक पहुंचाता है| श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान संगीतमय के साथ बड़े धूमधाम संपन्न किया गया| शाम: 6:30 बजे से संगीतमय श्रीजी मंगल आरती की गई| इस अवसर पर मनोज गौधा,महायज्ञ नायक इंद्र चंद्रमान जैन,मनोरमा जैन सौधर्म इंद्र अंकित जैन एवं अनु जैन, कुबेर इंद्र प्रशांत जैन एवं वंदना जैन,ईशांन इंद्र केके जैन एवं अनीता जैन,महेंद्रइंद्र अनिल जैन एवं मीना जैन समस्त समस्त बेलनगंज व जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे|
रिपोर्ट- मीडिया प्रभारी
शुभम जैन
(आगरा)
