स्मृति वर्ष 2015 आचार्य श्री विद्यासागर महाराज उद्बोधन

धर्म
स्मृति वर्ष 2015 आचार्य श्री विद्यासागर महाराज उद्बोधन सच्चे बनो देश हित मे काम करो आचार्यश्री
,जबलपुर|
सच्चे देशवासी हो तो देश के बारे में सोचो, केवल अपनी न सोचाे उदारमना बनकर सबका हित सोचो। धार्मिक अनुष्ठानों में मात्र पूजन तक सीमित न रखो ,व्यक्ति कलयाण के िवषय में िवचार करो। जब सर्व कल्याण के विषय में सोचेगो तभी देश का हित होगा और व्यक्ति से ज्यादा राष्ट्र सर्वोपरी होगा। दयोदय तीर्थ ितलवाराघाट में प्रात: कालीन सभा में उक्त आशय के उदगार आचार्य श्री िवद्यसागर जी महाराज ने व्यक्त िकये।
आचार्य श्री ने कहा िक महापुरुष एक क्षण नहीं गवांते हैं। दूसरों के दुख हरने,चार हाथ आगे देखकर चलते हैं कहीं कोई जीव प्राणी अाहत न हो जाए। वे स्वयं को महान बनाते हैं ,जो दूसरों के दुखों को हरते हैं और दूसरों को भी ऐसा ही करने प्रेरणा देते हैं। धर्म प्रवाह मूल्यवान है, वह श्रेष्ठ और परोपकारी व्यक्तियों को तैयार करता है, जब भी सोचो पूरा सोचाे और उसे संकल्प के रूप में धारण कर जीवन में उतारो, तभी बड़े कार्य हो सकते हैं। दोपहर की सभा को आचार्य श्री के शिष्य सौम्य सागर जी ने सम्बोधित करते हुये कहा िक तकनीकी विद्या ऐसी विद्या है जिसमें कम समय में ज्यादा परिणाम सामने आते हैं, हमारे जीवन में भी ऐसी तकनीकी है, लेकिन हम ध्यान नहीं देते।
               संकलित अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमंडी

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