नीमेडा ग्राम में आर्यिका रत्न 105 विज्ञा श्री माताजी स संघ के पावन सानिध्य में चल रहे तीन दिवसीय वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव में हुआ मंदिर वेदी शुद्धि संस्कार

मान का करें मर्दन विनय गुण का करें वर्धन आर्यिका विज्ञाश्री माताजी

फागी /नीमेडा
प. पू. भारत गौरव श्रमणी गणिनी आर्यिका रत्न 105 विज्ञाश्री माताजी ससंघ के पावन सान्निध्य में चल रहे तीन दिवसीय वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव में आज दूसरे दिन प्रतिष्ठाचार्य विमल कुमार जी बनेठा वालों के दिशा निर्देश में विभिन्न मंत्रोचारणों के बीच अनेक धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।समाज के प्रवक्ता राजाबाबू गोधा ने अवगत कराया कि प्रातः जिनाभिषेक, शांति धारा हुई, जिसमें आज श्री जी की शांति धारा करने का सौभाग्य रूपचन्द जी ,महावीर कुमार जी, रमेश जी सेठी परिवार ने प्राप्त किया एवं भगवान धर्मनाथजी के मोक्ष कल्याणक के उपलक्ष्य में निर्वाण लाडू चढ़ाने का अवसर प्रेमचंद जी ,सुशीला देवी सेठी ने प्राप्त किया, कार्यक्रम में प्रातः जिनेन्द्र अर्चना,जाप्यानुष्ठान, मंदिर वेदी संस्कार होने के बाद दोपहर में यागमण्डल विधान का भव्य आयोजन हुआ। पूज्य माताजी ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा कि -विनम्रता का अर्थ है अत्याधिक प्रतिकूल परिस्थितियों में भी पूरी तरह से समायोजित होने की क्षमता पैदा कर लेना. इलसिए विनम्र व्यक्ति कभी भी, कहीं भी नहीं टूटता।हमारे जीवन मे ज्ञान की वृद्धि हो या नहीं लेकिन अपने जीवन में विनम्रता होनी चाहिए, नम्रता से हमारे सभी कार्य सहज ही बन जाते हैं। पूर्ण मनुष्य वहीं है जो पूर्ण होने पर और बड़ा होने पर भी नम्र रहता हो और सेवा में निमग्न रहता हो,विद्या वह है जो व्यक्ति को झुकना सिखाए आज की विद्या मनुष्य को अकड़ना सिखाती है। आज समाज में कोई भी व्यक्ति झुकना नहीं चाहता। विद्या विनयशीलता सिखाती है जिससे जीवन में विनम्रता आती है लेकिन आज विनम्रता और झुकना दोनों लुप्त होते जा रहे हैं माताजी ने कहा कि – झुकता वही है जिसमे कुछ जान होती है,

वरना अकड़ तो खास कर मुर्दों की पहचान होती है *हम मान का मर्दन करे और विनय गुण को प्रकट करें तभी हमारा मानव जीवन सार्थक है। सांयकाल मंगल आरती, आनंद यात्रा, शास्त्र सभा बाद सांस्कृतिक संध्या का भव्य आयोजन किया गया
संकलन अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी
