आचार्यश्री समयसागर महाराज का मोहन भागवत को संदेश—गाय के प्रति जागे सच्ची श्रद्धा, तभी सार्थक होगी गो-रक्षा
**भोपाल में संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने किए आचार्यश्री के दर्शन, गोवंश संरक्षण, जीव-दया, राष्ट्रहित और ग्रामीण पलायन जैसे विषयों पर हुआ विचार-विमर्श**
**भोपाल।**
गाय के प्रति केवल मान्यता रखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके प्रति सच्ची श्रद्धा, संवेदना और सेवा का भाव जागृत होना जरूरी है। जब समाज के प्रत्येक व्यक्ति के मन में गोमाता के प्रति पूर्ण श्रद्धा का भाव उत्पन्न होगा, तभी गो-रक्षा वास्तविक अर्थों में सार्थक हो सकेगी। यह संदेश आचार्यश्री समयसागर महाराज ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत को दिया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने बुधवार को इंदौर प्रवास पर जाने से पहले भोपाल में रुककर रानी कमलापति (हबीबगंज) स्थित जिनालय में चातुर्मासरत आचार्यश्री समयसागर महाराज के दर्शन किए और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर गोवंश संरक्षण, जीव-दया, पशु कल्याण, राष्ट्रहित तथा ग्रामीण क्षेत्रों से हो रहे पलायन सहित विभिन्न सामाजिक और राष्ट्रीय विषयों पर चर्चा हुई।


### गो-रक्षा के लिए जन-जागरण पर जोर
मुलाकात के दौरान गोवंश संरक्षण का विषय प्रमुखता से उठा। आचार्यश्री ने गो-रक्षा के लिए समाज में जागरूकता बढ़ाने और जन-जागरण अभियान को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि लोगों के मन में गाय के प्रति सम्मान और मान्यता तो है, लेकिन उस मान्यता को सच्ची श्रद्धा और सेवा के रूप में परिणत करना भी आवश्यक है।


डॉ. मोहन भागवत ने वर्तमान परिस्थितियों में जीव-दया के कार्यों को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने, पशु संरक्षण तथा गोवंश की रक्षा के लिए आचार्यश्री से मार्गदर्शन प्राप्त किया।


जिनालय में भगवान के दर्शन के पश्चात डॉ. भागवत ने आचार्यश्री को श्रीफल अर्पित किया तथा पाद प्रक्षालन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान जीवों के प्रति करुणा, संवेदनशीलता और समाज की नैतिक जिम्मेदारी जैसे विषय भी चर्चा के केंद्र में रहे।


### राष्ट्रहित सर्वोपरि, ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने की जरूरत
चर्चा में राष्ट्रहित और नागरिकों के कर्तव्यों पर भी विचार-विमर्श हुआ। आचार्यश्री ने कहा कि प्रत्येक देशवासी के मन में राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए। देश के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करना हर नागरिक का कर्तव्य है।
ग्रामीण क्षेत्रों से लगातार हो रहे पलायन पर चिंता व्यक्त करते हुए आचार्यश्री ने गांवों को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है और राष्ट्र के नवनिर्माण एवं विकास में ग्रामीण समाज की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में ग्रामीण जीवन को सशक्त बनाने, गांवों में बेहतर अवसर उपलब्ध कराने और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास की दिशा में सार्थक प्रयास किए जाने चाहिए।
### डॉ. मोहन भागवत को मिला आचार्य विद्यासागर अलंकरण रत्न
इस अवसर पर सकल जैन समाज की ओर से समाधि स्मारक समिति, चंद्रगिरि तीर्थ डोंगरगढ़ द्वारा डॉ. मोहन भागवत को **महाकवि आचार्य विद्यासागर अलंकरण रत्न** से सम्मानित किया गया।
सम्मान स्वरूप उन्हें प्रशस्ति पत्र, रजत निर्मित गोवंश का प्रतीकात्मक चिह्न, आचार्य विद्यासागर महाराज द्वारा लिखित कृति तथा हथकरघा से निर्मित सामग्री भेंट की गई। इस सम्मान के माध्यम से जैन समाज की ओर से आचार्य विद्यासागर महाराज के विचारों, स्वदेशी भावना, जीव-दया और सामाजिक सरोकारों से जुड़े मूल्यों को भी रेखांकित किया गया।
### एकांत में भी हुई चर्चा, सामाजिक सरोकारों पर मंथन
आचार्यश्री समयसागर महाराज और डॉ. मोहन भागवत के बीच कुछ समय एकांत में भी चर्चा हुई। इस दौरान किन विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ, इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं हो सकी। हालांकि, उपलब्ध विवरण के अनुसार गो-रक्षा, गोवंश संरक्षण, जीव-दया और राष्ट्रहित जैसे व्यापक सामाजिक विषय इस मुलाकात के प्रमुख केंद्र रहे।
यह मुलाकात गोवंश संरक्षण के प्रति जन-जागरण, जीवों के प्रति करुणा, ग्रामीण भारत की मजबूती और राष्ट्र के प्रति नागरिकों के दायित्वों जैसे विषयों पर समाज का ध्यान आकर्षित करती है।
**संकलन: अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी**
