विषय-वासनाओं में भटका मन बनता है बंधन का कारण, सम्यक ज्ञान से मिलता है मुक्ति का मार्ग– आचार्य श्री सुनील सागरजी महाराज* 

धर्म

*विषय-वासनाओं में भटका मन बनता है बंधन का कारण, सम्यक ज्ञान से मिलता है मुक्ति का मार्ग– आचार्य श्री सुनील सागरजी महाराज*

 

नेमी नगर जैन कॉलोनी, इंदौर।

 

आचार्य श्री ने अपने प्रवचन में कहा मनुष्य के जीवन में मन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। जो मन विषय-वासनाओं में लीन रहता है, वह बंधन का कारण बनता है, जबकि जो मन सम्यक ज्ञान से प्रेरित होता है, वह मुक्ति के मार्ग की ओर अग्रसर करता है। जैन दर्शन के अनुसार, मन ही मनुष्य के बंधन और मोक्ष का कारण है। इसलिए मन को सही दिशा देना और उसे नियंत्रित करना आवश्यक है।

 

वर्तमान समय में मोबाइल के बढ़ते उपयोग ने लोगों की दिनचर्या और आपसी संवाद को प्रभावित किया है। स्थिति यह हो गई है कि व्यक्ति न किसी से ठीक से बात करता है, न दूसरों की ओर ध्यान देता है और न ही उनकी बातों को ध्यानपूर्वक सुनता है। सामान्यतः कहा जाता है कि बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो और बुरा मत बोलो, लेकिन आज स्थिति यह है कि व्यक्ति अच्छी बातों को देखने, सुनने और समझने से भी दूर होता जा रहा है।

 

मनुष्य के लिए अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रखना जितना आवश्यक है, उतना ही मन को स्थिर और एकाग्र बनाना भी जरूरी है। इंद्रियों पर नियंत्रण होने के बावजूद यदि मन चंचल बना रहता है, तो व्यक्ति सही दिशा में आगे नहीं बढ़ पाता। इसलिए आवश्यक है कि मन को विषय-विकारों से हटाकर सम्यक ज्ञान, सद्विचार और आत्मकल्याण की ओर प्रेरित किया जाए।

माही जैन धीरावत पीपलखूंट प्रतापगढ़ से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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