अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन शास्त्री परिषद के 6 दिवसीय शिक्षण-प्रशिक्षण शिविर का हुआ समापन – खुले अधिवेशन में शामिल हुए सैकड़ों विद्वत जन व श्रावकगण कई ग्रन्थों एवं पत्र-पत्रिकाओं का हुआ विमोचन

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अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन शास्त्री परिषद के 6 दिवसीय शिक्षण-प्रशिक्षण शिविर का हुआ समापन – खुले अधिवेशन में शामिल हुए सैकड़ों विद्वत जन व श्रावकगण कई ग्रन्थों एवं पत्र-पत्रिकाओं का हुआ विमोचन
जयपुर
– अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन शास्त्री परिषद के तत्वावधान में जयपुर की भट्टारक जी की नसिया में भारत गौरव गणिनी आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी के ससंघ सानिध्य में आयोजित 6 दिवसीय शिक्षण-प्रशिक्षण शिविर का समापन शुक्रवार, 27 मई को समारोह पूर्वक सम्पन्न हुआ ।


आयोजन समिति के महामंत्री विनोद जैन ‘कोटखावदा’ के अनुसार इस मौके पर शास्त्री परिषद का राष्ट्रीय खुला अधिवेशन आयोजित किया गया। जिसमें समाज हित के कई प्रस्ताव पारित किये गये। जिसमे 15 विद्वानों को प्रतिष्ठाचार्य, विधानाचार्य सहित कई उपाधियों से विभूषित किया गया। इसके साथ ही विशिष्ट विद्वतजनों को पुरस्कार दिए गए। एवम गणिनी आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी जयपुर प्रवास व्यवस्था समिति की ओर से सभी विद्वानों का सम्मान किया गया। इस मौके पर विभिन्न ग्रंथों एवं पत्र पत्रिकाओं का लोकार्पण संपन्न किया गया ।


गणिनी आर्यिका 105 श्री स्वस्ति भूषण माताजी जयपुर प्रवास व्यवस्था समिति जयपुर के शिरोमणि संरक्षक रमेश ठोलिया व महामंत्री विनोद जैन ‘कोटखावदा’ ने बताया कि समापन समारोह में जयपुर के सभी विशिष्ट महानुभावों के साथ श्री दिगम्बर जैन महासमिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर मणीद्र कुमार जैन एवं जैन समाज माॅडल टाउन दिल्ली के अध्यक्ष प्रमोद कुमार जैन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए । चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्जवलन मालवीय नगर निवासी युवा समाजसेवी मन्नू-निधि जैन ‘लोट्स ग्रुप वालों ने किया । समारोह की अध्यक्षता शास्त्री परिषद् के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रेयांस कुमार जैन ‘बड़ौत’ ने की । कार्यक्रम का संचालन परिषद के महामंत्री ब्रह्मचारी जय कुमार’ निशांत’ के द्वारा किया गया।


शिरोमणि संरक्षक रमेश ठोलिया व महामंत्री विनोद जैन ‘कोटखावदा’
ने बताया कि जयपुर के इतिहास में इस प्रकार जैन धर्म की विभिन्न विधाओं का शिक्षण प्रशिक्षण देने वाला यह शिविर अद्वितीय रहा जिसमें शताधिक विद्वानों के साथ श्रावक श्राविका को भी जैन दर्शन, जैन न्याय, यंत्र मंत्र तंत्र की विशेषता, पांडुलिपियों की विशेष जानकारी, मंदिर एवं जिनप्रतिमा की वास्तु विधि, छहढाला, वक्तव्य शैली एवं ध्यान के माध्यम से बहुत लाभ प्राप्त किया गया।
यह रहे शामिल
इस मौके पर समाजश्रेष्ठी विवेक काला, कमल बाबू जैन, रमेश जैन तिजारिया, शिखर चन्द कासलीवाल, राज कुमार कोठ्यारी,हेमन्त सोगानी, प्रदीप जैन, विनोद जैन ‘कोटखावदा’, माणक ठोलिया, रमेश ठोलिया,कुशल ठोलिया, सुनील बख्शी,
चेतन जैन निमोडिया, दीपक बिलाला, डॉ शीला जैन, ममता सोगाणी जापान वाले, पुष्पा सोगानी, मधु ठोलिया, आशा बज, दीपिका जैन कोटखावदा, पूनम चांदवाड, रेखा पाटनी सहित बड़ी संख्या में समाजश्रेष्ठी एवं विद्वतजन उपस्थित थे।
समारोह के दौरान भारत गौरव गणिनी आर्यिका105 स्वस्ति भूषण माताजी ससंघ को चातुर्मास के लिए मुरैना, जहाजपुर तथा जयपुर के दिगम्बर जैन समाज ने श्री फल भेट कर निवेदन किया।
ज्ञान की साधना अंत तक करते रहना चाहिए स्वस्तिभूषण माताजी


इस अवसर पर भारत गौरव गणिनी आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि सायकांल
शास्त्र स्वाध्याय अवश्य करना चाहिए। एवम ज्ञान की साधना अन्त तक करते रहना चाहिए। समर्पण की भावना एवं संकल्प के साथ शास्त्री परिषद् तथा समाज को आगे बढाये। एक दीपक से ही रोशनी अच्छी होती है, तो आप तो इतने सारे दीपक एक साथ हो। आपकी रोशनी तो सूरज से भी तेज होगी। अतः एक सूत्र में बंधकर समाज का उत्थान करे।
श्री जैन के मुताबिक इस मौके पर आचार्य श्री ज्ञान सागर महाराज की पूजा की गयी।एवम उनका आचार्य पदारोहण दिवस मनाया गया।
इससे पूर्व ब्रहचारी अनिता दीदी ने आचार्य श्री के जीवन चरित्र एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला।
श्री दिगम्बर जैन महासमिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष मणीन्द्र जैन ने अपने उदबोधन में समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने का आव्हान किया। एवम प्रवास समिति के मुख्य समन्वयक कमल बाबू जैन एवं महामंत्री विनोद जैन ‘कोटखावदा’ ने विद्वतजनों का आभार एवं धन्यवाद व्यक्त किया।
संकलित अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी

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