गलत व्यक्ति का समर्थन करना भ्रष्टाचार को प्रश्रय देना है : अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी

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गलत व्यक्ति का समर्थन करना भ्रष्टाचार को प्रश्रय देना है : अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी

 

बोले—धर्म, ईमान, चरित्र और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने वालों को ही चुनें जनप्रतिनिधि, राजनीति में से ‘नीति’ निकालने वालों से रहें सावधान

 

पुष्पगिरी।

“गलत व्यक्ति को चुनना अपने ही हाथों से अपने पैरों पर कुठाराघात करने जैसा है। गलत व्यक्ति का समर्थन करना भ्रष्टाचार को प्रश्रय देना है।” अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागरजी महाराज ने पुष्पगिरी तीर्थ में गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए लोकतंत्र, राजनीति और जनप्रतिनिधियों के चयन को लेकर समाज को गंभीर संदेश दिया।

 

आचार्यश्री ने कहा कि जिद, गुस्सा, गलती, लालच और अपमान नेताओं की तरह होते हैं। जो दूसरा करे तो चुभते हैं, लेकिन स्वयं करें तो उसका एहसास तक नहीं होता। उन्होंने कहा कि सामाजिक और राजनीतिक जीवन में नैतिक मूल्यों का होना बेहद जरूरी है। जनता को केवल राजनीतिक दल या चेहरे के आधार पर अपना प्रतिनिधि नहीं चुनना चाहिए, बल्कि उसके धर्म, ईमान, चरित्र और राष्ट्रहित के प्रति प्रतिबद्धता को भी परखना चाहिए।

 

राजनीति में से ‘नीति’ निकालने वालों से रहें सावधान

 

आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज ने कहा कि ऐसे लोगों को लोकसभा, विधानसभा और निकायों में प्रतिनिधित्व नहीं देना चाहिए, जो राजनीति में से ही ‘नीति’ को निकाल देना चाहते हैं। जनप्रतिनिधि का चरित्र और उसका आचरण ही उसकी वास्तविक पहचान होना चाहिए।

 

उन्होंने कहा कि जो लोग बात तो अखंडता की करते हैं, लेकिन उनके कार्य समाज और देश को खंडित करने की दिशा में होते हैं, उनसे जनता को सावधान रहना चाहिए। भारतीय होकर भी मानसिक रूप से विदेशी भाषा और संस्कृति की गुलामी करने वाले लोगों को जनप्रतिनिधि चुनने से पहले जनता को गंभीरता से विचार करना चाहिए।

 

कथनी और करनी में अंतर हो तो जनता पूछे सवाल

 

आचार्यश्री ने कहा कि जो लोग राम, कृष्ण, बुद्ध और महावीर का नाम लेकर जनता से समर्थन मांगते हैं, लेकिन वर्तमान संदर्भ में उनके विचारों को अप्रासंगिक मानते हैं, उनकी कथनी और करनी को समझना जरूरी है।

 

उन्होंने कहा कि गरीबों का मसीहा बनने का दावा करने वाले, लेकिन स्वयं विलासितापूर्ण जीवन जीने वाले लोगों से भी जनता को सवाल करना चाहिए। इसी तरह देशभक्ति के भाषण देने वाले नेताओं के आचरण, जीवनशैली और जीवन-मूल्यों का भी मूल्यांकन होना चाहिए।

 

आचार्यश्री ने कहा कि जो लोग दल अथवा पार्टी को देश से बड़ा समझते हैं और भ्रष्टाचार को शिष्टाचार का जामा पहनाने का प्रयास करते हैं, ऐसे लोगों को सत्ता की जिम्मेदारी सौंपना समाज और राष्ट्र के लिए घातक हो सकता है।

 

‘गलत आदमी का समर्थन नहीं करेंगे’—संकल्प लेने का आह्वान

 

आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज ने गुरु भक्तों और समाज से आह्वान किया कि “हम गलत आदमी को नहीं चुनेंगे और न ही गलत आदमी का समर्थन करेंगे।” उन्होंने कहा कि ऐसा संकल्प ही विकृत और गंदी राजनीति के सुधार का कारण बन सकता है।

 

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की जागरूकता ही सबसे बड़ी शक्ति है। यदि मतदाता जाति, दल, व्यक्तिगत संबंध और किसी भी प्रकार के प्रलोभन से ऊपर उठकर योग्य, ईमानदार, चरित्रवान और राष्ट्रहित को प्राथमिकता देने वाले व्यक्ति का चयन करें, तो राजनीति में सकारात्मक परिवर्तन संभव है।

 

प्रचार-प्रसार संयोजक नरेंद्र अजमेरा एवं पियूष कासलीवाल, औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी।

 

समाचार संकलन : अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी

मोबाइल : 9929747312

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