रामगंजमंडी के कामेश जैन सरवड़िया की ऑनलाइन जिज्ञासा पर आचार्यश्री का स्पष्ट संदेश—राजनीति में सहभागिता समाजहित के लिए हो, स्वार्थ के लिए नहीं

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जैन समाज की आवाज सत्ता के गलियारों तक पहुंचाने राजनीति में आएं योग्य युवा : आचार्य विनिश्चय सागर

रामगंजमंडी के कामेश जैन सरवड़िया की ऑनलाइन जिज्ञासा पर आचार्यश्री का स्पष्ट संदेश—राजनीति में सहभागिता समाजहित के लिए हो, स्वार्थ के लिए नहीं

रामगंजमंडी।

राजस्थान में प्रस्तावित नगरपालिका चुनावों के बीच जैन समाज की राजनीतिक भागीदारी को लेकर एक महत्वपूर्ण और विचारणीय संदेश सामने आया है। रामगंजमंडी के कामेश जैन सरवड़िया ने गाजियाबाद में विराजमान वाक्केसरी आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज से ऑनलाइन माध्यम से जिज्ञासा करते हुए पूछा कि जैन समाज को राजनीति में किस सीमा तक सहभागी होना चाहिए और जैन युवाओं को इस दिशा में क्या मार्गदर्शन दिया जा सकता है।

 

 

 

जिज्ञासा के उत्तर में आचार्यश्री ने कहा कि समाज को ऐसे लोगों की आवश्यकता है, जो उसकी बात को प्रभावी ढंग से शासन और सत्ता के उच्च स्तर तक पहुंचा सकें। उन्होंने कहा कि दिगंबर जैन समाज की एक बड़ी आवश्यकता यह है कि समाज की समस्याओं और हितों को मजबूती से रखने वाले लोग विभिन्न क्षेत्रों में आगे आएं।

 

 

आचार्यश्री ने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक समाज के लिए अपना पक्ष मजबूती से रखना आवश्यक है। देश में हर वर्ग और समाज के लोग राजनीति में सक्रिय हैं और अपने समाज की बात को उचित मंच तक पहुंचाते हैं। ऐसे में जैन समाज को भी योग्य एवं सक्षम लोगों को आगे बढ़ाने की दिशा में गंभीरता से विचार करना चाहिए।

 

 

धार्मिक क्षेत्रों की रक्षा के लिए मजबूत आवाज जरूरी

आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज ने गिरनार, सम्मेद शिखर और पावागढ़ जैसे धार्मिक एवं आस्था के केंद्रों से जुड़े विषयों का उल्लेख करते हुए कहा कि जब समाज के पास प्रभावी प्रतिनिधित्व नहीं होता तो उसकी बात को मजबूती से रखने में कठिनाई आती है।

उन्होंने पूर्व के उदाहरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि जब समाज से जुड़े लोग शासन और राजनीति में प्रभावशाली भूमिका में रहे, तब उन्होंने जैन समाज से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों को सरकार के समक्ष मजबूती से रखा। जैन समाज को अल्पसंख्यक दर्जा दिलाने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि समाज के प्रतिनिधियों की सक्रियता से महत्वपूर्ण विषयों को आगे बढ़ाने में मदद मिलती है।

 

 

“लोकतंत्र में संख्या भी महत्वपूर्ण है”

आचार्यश्री ने कहा कि लोकतंत्र में बहुमत का विशेष महत्व है। जैन समाज संख्या की दृष्टि से सीमित है, इसलिए समाज को और अधिक संगठित, जागरूक और सक्रिय होने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि “यदि आपके वोट अधिक हैं तो आपकी बात सुनी जाएगी, लेकिन यदि संख्या कम है तो अपनी बात मनवाने के लिए प्रभावी नेतृत्व और मजबूत प्रतिनिधित्व जरूरी है।”

 

युवाओं को दिया राजनीति में आने का संदेश

जैन युवाओं को संबोधित करते हुए आचार्यश्री ने कहा कि राजनीति को केवल सत्ता या पद प्राप्त करने का माध्यम नहीं समझना चाहिए। यदि कोई युवा स्वच्छता, ईमानदारी और समाजसेवा की भावना के साथ राजनीति में आता है तो वह समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

 

 

उन्होंने कहा कि योग्य जैन युवाओं को राजनीति से दूरी बनाने के बजाय समाजहित की भावना से आगे आना चाहिए। समाज की समस्याओं को समझना, उन्हें उचित मंच तक पहुंचाना और समाज के हितों की मजबूती से पैरवी करना भी समाजसेवा का ही एक रूप है।

आचार्यश्री का यह मार्गदर्शन आगामी नगरपालिका चुनावों के संदर्भ में जैन समाज के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऑनलाइन जिज्ञासा के दौरान रामगंजमंडी के समाजबंधुओं सहित अन्य श्रद्धालुओं ने भी आचार्यश्री का मार्गदर्शन प्राप्त किया।

अभिषेक जैन लुहाड़िया
रामगंजमंडी
मो. 9929747312

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