जिसने आपके लिए गड्ढा खोदा, उसी में आम-अमरूद का वृक्ष लगा दो : अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज
हिंसा क्षणिक शक्ति, अहिंसा अनंत शक्ति है—पुष्पगिरि सोनकच्छ में आचार्यश्री ने दिया शांति और सकारात्मक चिंतन का संदेश
पुष्पगिरि सोनकच्छ।
गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागरजी महाराज ने जीवन में विपरीत परिस्थितियों का सामना सकारात्मक चिंतन और अहिंसा के मार्ग से करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यदि किसी ने आपके लिए गड्ढा खोदा है तो चिंता मत करो, बल्कि अपने चिंतन को बदलो और उसी खोदे गए गड्ढे में आम-अमरूद का वृक्ष लगा दो।
आचार्यश्री ने कहा कि जीवन में नकारात्मकता का जवाब नकारात्मकता से देने के बजाय प्रेम, सम्मान और सकारात्मकता से देना चाहिए। उन्होंने कहा—
“आग का समाधान आग नहीं, पानी है।
गाली का समाधान गाली नहीं, गीत है।
अपमान का समाधान अपमान नहीं, सम्मान है।
और हिंसा का समाधान हिंसा नहीं, अहिंसा है।”
उन्होंने गुरु भक्तों को प्रेरणा देते हुए कहा कि खुद खाओ और पड़ोसी को भी खिलाओ, क्योंकि जीवन की वास्तविक सार्थकता केवल स्वयं के सुख में नहीं, बल्कि दूसरों के सुख और कल्याण में भी है।
हिंसा झूठी शक्ति, अहिंसा अनंत शक्ति
अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज ने कहा कि हिंसा का स्वागत नहीं किया जा सकता। हिंसा एक झूठी शक्ति है। उसका अस्तित्व दिखाई देता है, लेकिन वह अनंत नहीं है। हिंसा का अंत निश्चित है, जबकि अहिंसा अनंत है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में हिंसा और अहिंसा के बीच संघर्ष दिखाई दे रहा है। माहौल और परिस्थितियों को देखकर भले ही ऐसा लगे कि अहिंसा पर हिंसा हावी हो रही है, लेकिन सत्य यही है कि अंततः विजय सत्य और अहिंसा की ही होती है।
महाभारत का उदाहरण देते हुए आचार्यश्री ने कहा कि युद्ध के दौरान कभी कौरवों का तो कभी पांडवों का पलड़ा भारी दिखाई देता था, लेकिन अठारहवें दिन जब निर्णायक युद्ध हुआ तो अंततः विजय पांडवों की हुई। यह संदेश देता है कि सत्य और धर्म की राह भले ही कठिन और लंबी हो, लेकिन अंतिम विजय उसी की होती है।
रात जितनी काली होगी, सुबह उतनी ही करीब होगी
आचार्यश्री ने कहा कि वर्तमान समय में देश और समाज में हिंसा, अपमान, द्वेष, ईर्ष्या और कषाय का गहन अंधकार दिखाई दे रहा है। लेकिन इस अंधकार से निराश होने की आवश्यकता नहीं है।
उन्होंने कहा, “ध्यान रखना! रात जितनी काली होगी, सुबह उतनी ही करीब होगी।”
जब हमारे विवेक का सूर्योदय होगा, तब वर्षों से छाया हुआ अविवेक और अज्ञान का अंधकार स्वतः मिट जाएगा। आवश्यकता केवल इतनी है कि मनुष्य अपने चिंतन को सकारात्मक बनाए और अहिंसा, सत्य, प्रेम, सम्मान तथा करुणा को अपने जीवन का आधार बनाए।
आचार्यश्री का यह संदेश पुष्पगिरि सोनकच्छ में उपस्थित गुरु भक्तों के लिए आत्मचिंतन और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरणा बन गया।
प्रचार-प्रसार संयोजक : नरेंद्र अजमेरा, पीयूष कासलीवाल, औरंगाबाद
प्राप्त जानकारी : संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी
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