आर्यिका महायशमति माताजी का संदेश: बच्चों को फास्ट फूड की आदत से बचाएं, घर का पौष्टिक भोजन ही बनाएं जीवन का आधार
सीकर
वात्सल्य वारिधि पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर महाराज की परम शिष्या आर्यिका 105 महायशमति माताजी ने अपने प्रवचन में अभिभावकों से बच्चों के स्वास्थ्य और संस्कारों के प्रति सजग रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में फास्ट फूड की बढ़ती आदत बच्चों के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है।
प्रवचन के दौरान माताजी ने एक मार्मिक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि एक गांव में प्रतिदिन पाठशाला आने वाली लगभग 10–11 वर्ष की एक बालिका कुछ दिनों तक नहीं आई। पूछने पर उसकी बड़ी बहन ने बताया कि वह गंभीर रूप से बीमार होकर अस्पताल में भर्ती है। माताजी ने इस प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि परिवार के अनुसार बच्ची लंबे समय से नियमित भोजन के बजाय पैकेट वाले फास्ट फूड पर अधिक निर्भर रहती थी। उन्होंने इस घटना को बच्चों के खान-पान के प्रति लापरवाही का गंभीर उदाहरण बताते हुए अभिभावकों को सावधान रहने की प्रेरणा दी।
आर्यिका महायशमति माताजी ने कहा कि बच्चों को घर का ताजा और पौष्टिक भोजन खिलाना माता-पिता की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने आग्रह किया कि मैदा से बने खाद्य पदार्थ, नूडल्स, चाउमीन, बर्गर, पिज्जा और अन्य जंक फूड का सेवन यथासंभव कम किया जाए तथा बच्चों में घर के भोजन की आदत विकसित की जाए।
उन्होंने सभी अभिभावकों से संकल्प लेने का आह्वान करते हुए कहा कि यदि हम अपने बच्चों का स्वस्थ और उज्ज्वल भविष्य चाहते हैं तो उन्हें संतुलित एवं पौष्टिक आहार दें तथा फास्ट फूड की लत से दूर रखें। अच्छे संस्कारों के साथ स्वस्थ भोजन ही दीर्घ, निरोग और सुखी जीवन का आधार है।
प्राप्त जानकारी: राजेश पंचोलिया संकलन: अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी 9929747312
