श्री सेवायतन पिछले 18 वर्षों से निःशुल्क चिकित्सा सेवा का प्रभावी केंद्र, अफवाहों से बचें और स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें” — राष्ट्रसंत मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज

धर्म

श्री सेवायतन पिछले 18 वर्षों से निःशुल्क चिकित्सा सेवा का प्रभावी केंद्र, अफवाहों से बचें और स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें” — राष्ट्रसंत मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज

(गिरीडीह)

श्री सम्मेद शिखर तीर्थ क्षेत्र पर चिकित्सा सेवाओं को लेकर सोशल मीडिया पर फैलाए जाने वाले भ्रम और दुष्प्रचार पर चिंता व्यक्त करते हुए राष्ट्रसंत मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने कहा कि किसी भी घटना के बाद तथ्यों को जाने बिना नकारात्मक प्रचार करना उचित नहीं है। इससे सेवा कार्यों में लगे लोगों का मनोबल प्रभावित होता है तथा समाज में अनावश्यक भ्रम फैलता है।

 

 

 

मुनि श्री द्वारा शंकासमाधान कार्यक्रम में गुणायतन एवं श्री सेवायतन के राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी के प्रश्न का जबाब देते हुये स्पष्ट किया कि श्री सेवायतन पिछले लगभग 18 वर्षों से श्री सम्मेद शिखरजी क्षेत्र में निरंतर जनसेवा कर रहा है। यहाँ दस बेड का डे-केयर हॉस्पिटल संचालित है,जहाँ नियमित ओपीडी, पैथोलॉजी, एक्स-रे तथा अन्य आवश्यक चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध हैं। प्रतिदिन लगभग 100 से 125 रोगियों का निःशुल्क उपचार किया जाता है। वर्तमान में तीन एम्बुलेंस सेवाएँ संचालित हैं तथा चल चिकित्सालय (मोबाइल मेडिकल यूनिट) के माध्यम से भी ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाई जा रही हैं।इन सभी सेवाओं का संचालन पूर्णतः निःशुल्क है और इसका संपूर्ण वित्तीय भार गुणायतन परिवार द्वारा वहन किया जाता है। उन्होंने कहा कि श्री सम्मेद शिखरजी एक दूरस्थ धार्मिक क्षेत्र है,जहाँ मल्टी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराना व्यावहारिक रूप से अत्यंत कठिन है।इसलिए श्रद्धालुओं को भी अपनी स्वास्थ्य संबंधी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। यात्रा पर आने से पहले अपने स्वास्थ्य की जाँच अवश्य कराएँ, विशेषकर यदि बुखार, मधुमेह, उच्च रक्तचाप अथवा हृदय रोग जैसी समस्याएँ हों।

 

 

मुनिश्री ने स्वास्थ्य के प्रति सभी को जागरूक करते हुए कहा कि सामान्य बुखार आने पर बिना जाँच के लगातार एंटीबायोटिक दवाएँ लेना उचित नहीं है।पहले आवश्यक रक्त जाँच कराकर चिकित्सकीय परामर्श लें। कई बार दबा हुआ संक्रमण आगे चलकर गंभीर रूप धारण कर लेता है और मस्तिष्क अथवा अन्य अंगों को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने कहा कि शरीर के संकेतों की उपेक्षा कर केवल यात्रा पूरी करने काआग्रह कभी-कभी अत्यंत गंभीर परिणाम दे सकता है।

 

 

मुनिश्री ने यह भी बताया कि दूरस्थ क्षेत्र होने के कारण योग्य चिकित्सकों की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती है।अनेक डॉक्टर वहाँ स्थायी रूप से सेवा देने के लिए तैयार नहीं होते।उन्होंने समाज के सेवा निवृत्त चिकित्सकों से भावपूर्ण आह्वान करते हुए कहा कि जिनकी पारिवारिक जिम्मेदारियाँ पूर्ण हो चुकी हैं, वे श्री सम्मेद शिखरजी आकर सेवा का पुण्य अर्जित करें। चिकित्सा सेवा भी एक महान धर्म साधना है।

 

 

उन्होंने समाज से आग्रह किया कि किसी भी घटना पर प्रतिक्रिया देने से पहले सत्य तथ्यों की जानकारी अवश्य प्राप्त करें। श्री सेवायतन की सेवाओं से प्रतिदिन साधु-संतों, यात्रियों तथा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के असंख्य लोग लाभान्वित हो रहे हैं। प्रत्येक दिन की चिकित्सा सेवाओं का विवरण भी नियमित रूप से उपलब्ध कराया जाता है। उपलब्ध संसाधनों के अनुसार संस्था निरंतर सर्वोत्तम सेवा देने का प्रयास कर रही है।
मुनिश्री ने कहा कि श्रद्धा के साथ-साथ सजगता भी आवश्यक है। श्री सम्मेद शिखरजी की यात्रा पर आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को अपने स्वास्थ्य की समुचित तैयारी के साथ ही यात्रा करनी चाहिए, जिससे तीर्थयात्रा मंगलमय और सुरक्षित बन सके इस अवसर पर उपस्थितइस अवसर पर उपस्थित वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. प्रदीप बांजल (इंदौर) ने बताया कि कई बार मलेरिया के प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम जैसे परजीवी अथवा गंभीर वायरल संक्रमण प्रारंभिक अवस्था में दबे रह जाते हैं।समय पर जाँच और उचित उपचार न मिलने पर संक्रमण मस्तिष्क तक पहुँच सकता है तथा मल्टी ऑर्गन फेलियर जैसी गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है। उन्होंने सलाह दी कि दो-तीन दिन तक अनावश्यक दवाओं के प्रयोग से बचें, चिकित्सकीय परीक्षण कराएँ और उसके बाद ही उचित उपचार प्रारंभ करें।

अविनाश जैन विद्यावाणी से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *