द्रोणागिरी पर्वत की गुरुदत्त स्वामी निर्वाण भूमि गुफा में प्रसन्न सागर महाराज ने लगाया ध्यान
द्रोणागिरी
सिद्ध क्षेत्र भूमि एवम गुरुदत्त स्वामी की निर्वाण स्थली द्रोणागिरी में अंतरमना आचार्यश्री 108 प्रसन्न सागर महाराज ने सिद्ध क्षेत्र की वंदना की एवं वंदना के दौरान जिस गुफा में गुरुदत्त स्वामी महाराज ने निर्वाण को प्राप्त किया उस गुफा में बैठकर तपस्वी संत अंतरमना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर महाराज ने काफी समय बैठकर ध्यान लगाया जब गुरुवर ध्यान लगा रहे थे तो बहुत ही अलौकिक दृश्य परिलक्षित हो रहा था।


पूज्य आचार्य श्री ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि तीन नेक कार्य करो यदि शुभ कार्य है – तो ज्यादा मत सोचो, शुरू कर दो। यदि श्रेष्ठ है – तो वादा मत करो, करके दिखाओ।
हौसला बुलन्द हो – तो हल्ला मत करो, साबित करके दिखाओ।
क्योंकि –आज की जिन्दगी में कहने का नहीं, करके दिखाने का वक्त है।
महाराज श्री ने कहा कि आज सुख, शान्ति, आनंद, प्रेम और प्रसन्नता की उम्मीदें, दूसरों से नहीं, खुद अपने आप से करें। दूसरों से लगाई गई उम्मीद उस शीशे की तरह है जो जरा से धक्के से चकनाचूर हो जाता है। हमें आदत सी पड़ जाती है दूसरों से अपेक्षा करने की। यहां तक की हम अपने हर कार्य की खुशी की उम्मीदें दूसरों से करने लगते हैं। जबकि यह हमारा खुद का प्रयास होना चाहिए। जब हम दूसरों से उम्मीद या हद से ज्यादा अपेक्षा करने लगते हैं, तो हमारा जीवन सात तरह से प्रभावित होता है — अनिच्छापूर्वक, अप्रसन्नता, झुंझलाहट, चिड़चिड़ापन, भीतर ही भीतर घुटन, मन की उदासी या डिप्रेशन के शिकार।

वर्तमान प्रासंगिकता पर गुरुवर ने कहा कि आज के दौर में झुंझलाहट, चिड़चिड़ापन, भीतर की घुटन ज्यादातर देखने में आ रहा है। बात बात में झुंझलाना और चिड़चिड़ाना हमारा स्वभाव ही बन गया है।इसलिए अपनी उम्मीदों को दुनिया और दुनिया वालों से कम से कम रखें और सुखी रहें। क्योंकि सफलता खुशी की चाबी नहीं है। बल्कि खुशी सफलताओं की चाबी है।
नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
