इंदौर में इतिहास का शुभारंभ: जगत पूज्य के आगमन की प्रतीक्षा श्रीश ललितपुर की समर्पित लेखनी

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 इंदौर में इतिहास का शुभारंभ: जगत पूज्य के आगमन की प्रतीक्षा श्रीश ललितपुर की समर्पित लेखनी

 

जगत पूज्य निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव श्री 108 सुधासागर जी महाराज के चरण जैसे-जैसे इंदौर की ओर अग्रसर हो रहे हैं, वैसे-वैसे भौतिक वैभव, आधुनिकता और विकास की चमक से जगमगाता इंदौर अब अध्यात्म की एक नई आभा से आलोकित होने को आतुर दिखाई देने लगा है। ऐसा प्रतीत होता है मानो पूरा शहर किसी महान आध्यात्मिक पर्व की प्रतीक्षा में सांसें थामे खड़ा हो।

 

 

प्रत्येक गली, प्रत्येक मोहल्ला, प्रत्येक जिनालय और प्रत्येक समाज संस्था के भीतर एक ही चर्चा है—गुरुदेव का आगमन। कुछ समय पूर्व तक समाज के अनेक श्रेष्ठिजन अपने-अपने क्षेत्र, अपने-अपने जिनालय और अपने-अपने मोहल्ले में गुरुदेव के पदार्पण की कल्पनाएँ कर रहे थे, किन्तु जैसे-जैसे गुरुदेव की वाणी और उनकी भावना को निकट से समझने का अवसर मिला, वैसे-वैसे सभी ने यह अनुभव कर लिया कि आचार्य भगवन् श्री विद्यासागर जी महाराज की परम्परा में दीक्षित यह महापुरुष केवल स्थान विशेष का नहीं, सम्पूर्ण समाज की एकता का प्रतिनिधि है।

 

आज स्थिति यह है कि अलग-अलग स्वर एक विशाल उद्घोष में परिवर्तित हो चुके हैं—”इंदौर चलो, इंदौर जोड़ो, इंदौर को एक करो।” समाज ने समझ लिया है कि मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज का नगर प्रवेश केवल भौगोलिक प्रवेश नहीं होगा, बल्कि वह सामाजिक समरसता, संगठन और एकात्मता का भी प्रवेश होगा। वे उसी परम्परा के वाहक हैं, जिसके लिए आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने जीवनभर समाज को संगठित रहने, एकजुट रहने और सामूहिक शक्ति को धर्म की सेवा में लगाने का संदेश दिया।

 

“कलऊ एकता बलम्” का उद्घोष जिनके जीवन का व्यवहारिक मंत्र है, ऐसे जगत पूज्य निश्चित ही समाज की एकता को देखकर प्रसन्न होंगे। इंदौर की यही एकता उनके स्वागत की सबसे बड़ी पुष्पांजलि सिद्ध होगी। जिस दिन गुरुदेव का नगर प्रवेश होगा, उस दिन केवल सड़कों पर जनसैलाब नहीं उमड़ेगा, बल्कि हृदयों में वर्षों से संचित श्रद्धा का सागर भी उमड़ पड़ेगा।

 

सुनने में आ रहा है कि इंदौर के विभिन्न संगठनों और पदाधिकारियों ने एक अभिनव पहल भी प्रारंभ की है। घर-घर पीले चावल पहुँचाकर समाज को इस ऐतिहासिक अवसर का सहभागी बनाने का प्रयास किया जा रहा है। यह केवल निमंत्रण नहीं, बल्कि एकता का संदेश है; यह केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज को एक सूत्र में पिरोने का संकल्प है। वर्षों से अपनी-अपनी जिम्मेदारियों में व्यस्त समाजजन अब एक-दूसरे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं और आने वाले समय को स्वर्णिम बनाने में जुट गए हैं।

 

समाज कभी बिखरा नहीं था, केवल परिस्थितियों और दायित्वों ने उसे अलग-अलग दिशाओं में व्यस्त कर रखा था। अब गुरुदेव के आगमन ने उन सभी दिशाओं को पुनः एक केन्द्र पर ला खड़ा किया है। यही कारण है कि आज इंदौर में केवल तैयारियाँ नहीं हो रहीं, बल्कि इतिहास लिखा जा रहा है। ऐसा इतिहास, जिसे आने वाले वर्षों में श्रद्धा और गौरव के साथ स्मरण किया जाएगा।

 

जब तक जगत पूज्य इंदौर में विराजमान रहेंगे, तब तक देश-दुनिया केवल एक साधु का प्रभाव ही नहीं देखेगी, बल्कि एक ऐसे नगर का परिवर्तित स्वरूप भी देखेगी जो अध्यात्म, संगठन, सेवा और श्रद्धा की अनुपम मिसाल बन चुका होगा। भौतिक उन्नति के लिए प्रसिद्ध इंदौर अब आध्यात्मिक उन्नति के नए अध्याय लिखने को तैयार खड़ा है।

 

जयघोष गूंज रहे हैं, श्रद्धा उमड़ रही है, समाज संगठित हो रहा है और इंदौर अपने आराध्य संत के स्वागत के लिए बाहें फैलाए खड़ा है।

 

जगत पूज्य की जय!

निर्यापक श्रमण की जय!

इंदौर तैयार है—आगवानी के लिए, इतिहास रचने के लिए और अध्यात्म के स्वर्णिम अध्याय का साक्षी बनने के लिए।

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