छीपीटोला में हुआ दो जैन संघों का ऐतिहासिक वात्सल्य मंगल मिलन- परम्पराचार्य श्री सौभाग्य सागर एवं सुरत्नसागराचार्य ससंघ पहुँचे छीपीटोला

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छीपीटोला में हुआ दो जैन संघों का ऐतिहासिक वात्सल्य मंगल मिलन- परम्पराचार्य श्री सौभाग्य सागर एवं सुरत्नसागराचार्य ससंघ पहुँचे छीपीटोला

आगरा-

14 जुलाई को प्रात: 7:00 बजे अंकलीकर परम्पराचार्य आचार्य श्री सौभाग्यसागर जी महाराज एवं स्थविर संत श्री सुरत्नसागराचार्य जी महाराज ससंघ ने श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर,ताजगंज से मंगल विहार किया।मंगल विहार बिजलीघर चौराहे से होते हुए बैंड- बाजों, धर्मध्वजाओं और जयघोष के बीच विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए छीपीटोला जैन मंदिर पहुँचा, जहाँ श्रद्धालुओं ने जगह-जगह आचार्य संघ का भव्य स्वागत किया। मंदिर परिसर के बाहर मुनिश्री समत्वसागर जी महाराज, मुनिश्री शीलसागर जी महाराज ससंघ ने वात्सल्य भाव से अंकलीकर परम्पराचार्य श्री सौभाग्य सागर जी महाराज ससंघ का मंगल स्वागत किया।

 

 

 

दोनों संघों का यह ऐतिहासिक मिलन श्रद्धा, स्नेह और आध्यात्मिक उल्लास से परिपूर्ण रहा। जैसे ही दोनों संघ आमने-सामने आए, पूरा वातावरण जय-जय गुरुदेव और जय जिनेन्द्र के गगन भेदी जयघोष से गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालुओं ने विनयपूर्वक वंदना कर आचार्य एवं मुनिसंघ का मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दुर्लभ वात्सल्य मंगल मिलन के साक्षी बनकर उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

 

मंगल मिलन के पश्चात जिन अभिषेक दर्शन संपन्न हुए। इसके बाद दोनों संघ एक साथ निर्मल सदन के लिए मंगल विहार करते हुए धर्मसभा स्थल पहुँचे। मार्गभर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर संतों का अभिनंदन किया और धर्ममय वातावरण बना रहा। इस अवसर पर छीपीटोला पंचायती मंदिर कमेटी एवं आगरा दिगम्बर जैन परिषद के पदाधिकारियों ने अंकलीकर परम्पराचार्य श्री सौभाग्यसागर जी महाराज के पावन चरणों का प्रक्षालन कर श्रद्धाभाव से वंदन किया। साथ ही समस्त आचार्य संघ के समक्ष शास्त्र भेंटकर गुरु परम्परा के प्रति अपनी आस्था और समर्पण व्यक्त किया। इसके बाद निर्मल सदन में विशाल धर्मसभा का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।

 

 

 

धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री समत्वसागर जी महाराज ने कहा कि गुरु परम्परा का वात्सल्य और संतों का आपसी स्नेह पूरे समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। जब संत एक मंच पर विराजमान होते हैं, तब समाज को धर्म, अनुशासन,संस्कार और संगठन की नई दिशा प्राप्त होती है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से धर्म साधना, संयम और सदाचार को जीवन का आधार बनाने का आह्वान किया तथा इस ऐतिहासिक वात्सल्य मंगल मिलन को समाज की एकता और आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक बताया।

 

 

मंगल प्रवचन के मध्य ही जयपुर हाउस जैन समाज ने अंकलीकर परम्पराचार्य आचार्य श्री सौभाग्यसागर जी महाराज ससंघ के चरणों में श्रीफल भेंटकर श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर जयपुर हाउस में मंगल चातुर्मास हेतु विनम्र निवेदन किया। धर्मसभा में स्थविर संत श्री सुरत्न सागराचार्य जी महाराज ने कहा कि संतों का मिलन केवल व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि धर्म,संस्कार और आत्म जागरण का महापर्व होता है। ऐसे दुर्लभ अवसर समाज में एकता, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं। उन्होंने सभी को धर्ममय जीवन अपनाने और संयम के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।इस ऐतिहासिक वात्सल्य मंगल मिलन में आगरा सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान भक्ति,श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने इसे आगरा जैन समाज के लिए एक ऐतिहासिक एवं अविस्मरणीय क्षण बताते हुए तीनों संघों से मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम का संचालन पंडित विजय जैन द्वारा किया गया

 

 

।इस मोके पर मनोज जैन बल्लो,मुरारीलाल जैन,दीपक जैन, जगदीश प्रसाद जैन, मनोज जैन बाकलीवाल,अभिषेक जैन,आशु बाबा, सतेन्द्र जैन,राकेश जैन परर्देवाले,दीपक जैन, सुबोध पाटनी, नीरज जैन जिनवाणी चैनल,राजीव जैन,दिलीप जैन मीडिया प्रभारी शुभम-जैन समस्त एनसीसी क्लब छीपीटोला के सदस्य और छीपीटोला जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

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