रंगों में सजी श्रद्धा: ‘अमृत सुधा कला महोत्सव’ में पुष्पा पांड्या की चित्र प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र, मुनि पुंगव सुधा सागर महाराज ने सराहा अद्भुत सृजन

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रंगों में सजी श्रद्धा: ‘अमृत सुधा कला महोत्सव’ में पुष्पा पांड्या की चित्र प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र, मुनि पुंगव सुधा सागर महाराज ने सराहा अद्भुत सृजन

गुना।

 

जैन धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना को कला के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से ऋषभायतन परिसर में आयोजित ‘अमृत सुधा कला महोत्सव’ में इंदौर की सुप्रसिद्ध चित्रकार एवं वर्तमान में बेंगलुरु निवासी पुष्पा क्रांति कुमार पांड्या की भव्य चित्र प्रदर्शनी श्रद्धालुओं और कला प्रेमियों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही। प्रदर्शनी में मुनि पुंगव श्री 108 सुधा सागर महाराज के व्यक्तित्व, कृतित्व, तप, साधना, गुरु-भक्ति एवं जैन संस्कृति को अत्यंत भावपूर्ण और जीवंत चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया।

 

 

प्रदर्शनी में प्रदर्शित प्रत्येक चित्र श्रद्धा, आध्यात्मिकता और भारतीय संस्कृति की अनूठी झलक प्रस्तुत कर रहा था। बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं, कलाकारों एवं दर्शकों ने चित्रों की भाव-समृद्ध अभिव्यक्ति की मुक्तकंठ से प्रशंसा की।

विशेष बात यह रही कि मुनि पुंगव श्री सुधा सागर महाराज ने स्वयं प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने प्रत्येक चित्र को गंभीरता और आत्मीयता से देखा तथा चित्रकार पुष्पा पांड्या से उसके विषय, कल्पना और भावाभिव्यक्ति पर विस्तार से चर्चा की। आचार्य श्री विद्यासागर महाराज एवं ऐलक श्री गंभीर सागर महाराज के साथ आध्यात्मिक संबंधों, नारेली तीर्थ, अभिषेक एवं पूजन, श्रमण संस्कृति संस्थान में अध्ययनरत बालकों तथा जैन जीवन मूल्यों पर आधारित चित्रों ने मुनिश्री को विशेष रूप से भावविभोर किया।

 

मुनिश्री ने चित्रकार की कल्पनाशीलता, आध्यात्मिक दृष्टि और सांस्कृतिक संवेदनशीलता की सराहना करते हुए कहा कि कला तभी सार्थक होती है जब वह समाज को संस्कार, प्रेरणा और धर्म की ओर अग्रसर करे।

 

प्रदर्शनी का संयोजन गुना के उद्योगपति महावीर पांड्या ने किया, जबकि शुभारंभ आगरा से पधारे पन्नालाल बेनारा एवं सरला बेनारा के करकमलों से सम्पन्न हुआ। प्रदर्शनी ने यह संदेश दिया कि कला केवल सौंदर्य का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और धर्म प्रभावना का सशक्त साधन भी है।

 

कला, संस्कृति और समाज सेवा को समर्पित है पुष्पा पांड्या का जीवन

एम.ए. (ड्राइंग एंड पेंटिंग) में स्वर्ण पदक प्राप्त चित्रकार पुष्पा क्रांति कुमार पांड्या पिछले कई दशकों से कला, संस्कृति और समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे रही हैं। वर्ष 1988 से वे सामाजिक विषयों पर नाटक लेखन, निर्देशन, क्विज, वाद-विवाद एवं भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन करती आ रही हैं।

 

 

उन्होंने जैन तीर्थों पर अनेक डॉक्यूमेंट्री का लेखन एवं निर्देशन किया है, जिनका प्रदर्शन अमेरिका में आयोजित JAINA Convention में भी किया गया। मध्यप्रदेश के लगभग 50 गांवों में स्वास्थ्य एवं पोषण शिविर आयोजित करने के साथ-साथ कला एवं नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से शाकाहार और भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

देश-विदेश में दिलाई जैन कला को नई पहचान

पुष्पा पांड्या ने बावनगजा, श्रवणबेलगोला, खजुराहो, कुंडलपुर सहित देश के अनेक प्रमुख जैन तीर्थों पर कला महोत्सव आयोजित किए हैं। भारत एवं अमेरिका में आयोजित अनेक कला प्रदर्शनियों के माध्यम से उन्होंने जैन धर्म और संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वे एक सफल चित्रकार होने के साथ लेखिका, वायलिन वादक, सामाजिक कार्यकर्ता तथा शाकाहार की सशक्त प्रचारक भी हैं।

संकलन : अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी।9929747312

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