गुना से मंगल विहार पर भावुक हुआ जनसैलाब: बजरंगगढ़ तीर्थ से आचार्य सुधासागर महाराज का ऐतिहासिक प्रस्थान, राजस्थान में फिर जगी आगमन की उम्मीद
गुना।
परम पूज्य निर्यापक श्रमण मुनिश्री 108 सुधासागर महाराज का गुना नगर में लगभग एक माह तक चला धर्ममय प्रवास शनिवार, 4 जुलाई 2026 को मंगल विहार के साथ संपन्न हो गया। पुण्योदय तीर्थ, बजरंगगढ़ से हुए इस मंगल विहार के दौरान श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं और पूरा वातावरण भक्ति, श्रद्धा तथा भावनाओं से सराबोर दिखाई दिया।
मंगल विहार के अनुपम क्षणों में केवल गुना ही नहीं, बल्कि समूचा बुंदेलखंड भावविभोर हो उठा। जगतपूज्य मुनिश्री के विहार के समय हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए उमड़ पड़े। हर किसी के मन में एक ही भाव था—”उड़ चला पंछी रे हरी-भरी डाल-डाल से, रोको रे रोको कोई मुनि को विहार से।” श्रद्धालु भावुक स्वर में गुरुदेव से पुनः लौटने की प्रार्थना करते रहे।
गुना प्रवास को श्रद्धालु ऐतिहासिक और अविस्मरणीय बता रहे हैं। इस दौरान मुनिश्री के प्रवचनों, ज्ञानगंगा और धर्म प्रभावना से न केवल जैन समाज, बल्कि संपूर्ण गुना नगर आध्यात्मिक वातावरण में रंगा रहा। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु धर्म लाभ लेने पहुंचते रहे।
शनिवार को पंचमुखी पंचकल्याणक महापात्र सम्मान समारोह के उपरांत जगतपूज्य निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ससंघ का पुण्योदय तीर्थ, बजरंगगढ़ से मंगल विहार हुआ। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने भावभीनी विदाई दी और गुरुदेव के पुनः आगमन की कामना की।
अब राजस्थान की ओर टिकी श्रद्धालुओं की निगाहें
मंगल विहार के साथ ही राजस्थान के श्रद्धालुओं की उम्मीदें भी एक बार फिर प्रबल हो गई हैं। वर्ष 2021 में चांदखेड़ी तीर्थ प्रवास के दौरान पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में गुरुदेव ने संकेत देते हुए कहा था कि “राजस्थान वासियों, पांच वर्ष प्रतीक्षा करें।” अब पांच वर्ष पूरे होने के बाद श्रद्धालुओं के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि संभवतः राजस्थान का लंबा इंतजार समाप्त होने वाला है।
हालांकि गुरुदेव का अगला वर्षायोग कहां होगा, इसे लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। कोई इंदौर की संभावना जता रहा है, कोई भोपाल, सागर या जबलपुर का नाम ले रहा है। वहीं राजस्थान के श्रद्धालु पूर्ण विश्वास के साथ गुरुदेव के आगमन की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
श्रद्धालुओं का मानना है कि यदि पुण्य का उदय हुआ तो चांदखेड़ी तीर्थ, नारेली तीर्थ, सिलोर तीर्थ अथवा आदित्य परिकल्पना के साकार रूप वीरोदय तीर्थ को गुरुदेव के पावन चरणों का सान्निध्य प्राप्त हो सकता है। फिलहाल पूरा राजस्थान श्रद्धा और उत्साह के साथ उस शुभ क्षण की प्रतीक्षा कर रहा है।

रिपोर्ट: अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी 9929747312
