अर्हम योग से तन-मन रहेगा स्वस्थ, धर्म ध्यान से मिलेगा जीवन को सही मार्ग : मुनि प्रणम्य सागर महाराज
बड़ोदिया।
आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज के शिष्य मुनिश्री 108 प्रणम्य सागर महाराज ने धर्मसभा में युवाओं को स्वस्थ, संयमित एवं संस्कारित जीवन जीने का प्रेरक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज का युवा आधुनिक जीवनशैली, तनाव और अनियमित दिनचर्या के कारण शारीरिक एवं मानसिक समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे समय में यदि युवा अपने जीवन में अर्हम योग, धर्म ध्यान और संयम को अपनाए, तो वह न केवल निरोग रह सकता है, बल्कि अपने व्यक्तित्व को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।
मुनिश्री ने कहा कि स्वस्थ शरीर ही साधना, सफलता और सुखी जीवन का आधार है। जब शरीर स्वस्थ होगा तो मन प्रसन्न रहेगा और प्रसन्न मन जीवन की हर चुनौती का सहजता से सामना करने में सक्षम होगा। उन्होंने युवाओं से प्रतिदिन नियमित योग, प्राणायाम और ध्यान करने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को आत्मचिंतन और धर्म ध्यान के लिए भी समय अवश्य निकालना चाहिए। इससे मन की चंचलता समाप्त होती है, एकाग्रता बढ़ती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
उन्होंने कहा कि अर्हम योग केवल शरीर को निरोग रखने की विधि नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि और जीवन में अनुशासन स्थापित करने का श्रेष्ठ माध्यम है। यदि योग के साथ संयम, सात्विक आहार और श्रेष्ठ संस्कार जुड़ जाएं, तो व्यक्ति अनेक रोगों से दूर रहकर संतुलित और सुखमय जीवन जी सकता है।
मुनिश्री ने युवाओं को मोबाइल और सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से बचने की सलाह देते हुए कहा कि समय का सदुपयोग करें, माता-पिता, गुरुजनों और धर्म के प्रति श्रद्धा रखें तथा अच्छे विचारों को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। उन्होंने कहा कि जीवन की वास्तविक सफलता धन या पद से नहीं, बल्कि स्वस्थ शरीर, शांत मन और श्रेष्ठ चरित्र से प्राप्त होती है।




मुनिश्री के विहार के दौरान बड़ोदिया सहित आसपास के गांवों के जैन समाज के श्रद्धालु उपस्थित रहे। मुनि संघ वर्तमान में वागड़ क्षेत्र से गुजरात स्थित पावागढ़ सिद्ध क्षेत्र की ओर विहाररत है।
संकलन : अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी मो. 9929747312 :::
