*”सुख, शांति और सम्मान का मार्ग धर्म और संयम से होकर जाता है” — आचार्य श्री 108 सुनीलसागर जी महाराज

धर्म

*”सुख, शांति और सम्मान का मार्ग धर्म और संयम से होकर जाता है” — आचार्य श्री 108 सुनीलसागर जी महाराज*

राणापुर , मध्यप्रदेश।26 जून।

 परम पूज्य प्राकृताचार्य, राष्ट्र गौरव, आचार्य भगवंत 108 श्री सुनीलसागर जी महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि यदि जीवन में सुख चाहते हो तो देर रात तक जागने की आदत छोड़ दो। जो व्यक्ति देर रात तक जागता है, उसका मन और मस्तिष्क अशांत रहता है। उन्होंने प्रेरणा देते हुए कहा कि “Early to Bed, Early to Rise” का सिद्धांत अपनाएं, प्रातःकाल शीघ्र उठकर धर्म चिंतन, स्वाध्याय और मनन में समय व्यतीत करें, यही जीवन को सार्थक बनाने का मार्ग है।

 

 

गुरुदेव ने कहा कि जो व्यक्ति शांति चाहता है, उसे दिन में अधिक समय तक नहीं सोना चाहिए। दिन में सोने से आलस्य बढ़ता है और बहुमूल्य समय व्यर्थ चला जाता है। वहीं सम्मान प्राप्त करना है तो व्यर्थ और अनावश्यक वाणी का त्याग करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अधिक बोलने वाला व्यक्ति प्रायः अपमान का भागी बनता है, जबकि विवेकशील व्यक्ति आवश्यकतानुसार ही बोलता है।

आचार्य श्री ने वर्तमान समाज का उदाहरण देते हुए कहा कि आज भौतिक वैभव जीवन की सुरक्षा और सुख की गारंटी नहीं है। उन्होंने एक घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि एक युवक ने विवाह के लिए 17 करोड़ रुपये का महल बुक कराया, लेकिन जिससे शादी होने वाली थी उसी युवती ने उसकी हत्या करवा दी। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने संदेश दिया कि धन और बाहरी वैभव से अधिक महत्वपूर्ण सदाचार, संस्कार और सही सोच है।

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गुरुदेव ने कहा कि मनुष्य को सदैव सकारात्मक सोच रखनी चाहिए, अच्छे कार्य करते रहना चाहिए तथा यथाशक्ति दूसरों की सहायता और उपकार करना चाहिए। उन्होंने सभी को अहिंसा, सत्य और सदाचार का पालन करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि हिंसा न करें, झूठ न बोलें, परस्त्री के प्रति कुदृष्टि या कुविचार न रखें तथा आवश्यकता से अधिक परिग्रह (संग्रह) न करें।Colorful poster advertising a print gallery with Buddha statues, saints, circular photo frames, a burger image, contact numbers, and an address at the bottom.Collage: woman with red petals on left, decorative diya on right, Hindi text about astrology and a phone number for advice.

 

यही जैन धर्म का मूल संदेश है और इन्हीं सिद्धांतों का पालन कर व्यक्ति सच्चे सुख, शांति और सम्मान की प्राप्ति कर सकता है।

 आर्यिका 105 श्री संपूर्णमति माताजी से प्राप्त आलेख संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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