दिगम्बर-श्वेताम्बर ही नहीं, पूरा गांव उतरा गुरुवर की अगवानी में

धर्म

दिगम्बर-श्वेताम्बर ही नहीं, पूरा गांव उतरा गुरुवर की अगवानी में

रानापुर (मध्यप्रदेश), 24 जून 2026।

मध्यप्रदेश की सीमा में प्रवेश के पश्चात परम पूज्य मुनिकुंजर ज्येष्ठाचार्य श्री आदिसागर जी महाराज (अंकलीकर) परम्परा के चतुर्थ पट्टाधीश, प्राकृताचार्य, राष्ट्र गौरव आचार्य भगवंत 108 श्री सुनीलसागर जी महाराज ससंघ का प्रथम मंगल प्रवेश रानापुर नगर में अत्यंत भव्य, श्रद्धामय एवं ऐतिहासिक वातावरण में सम्पन्न हुआ। बैंड-बाजों, मंगल गीतों, जयघोषों और धर्मध्वजाओं के साथ नगरवासियों ने गुरुवर की अगवानी की। संपूर्ण नगर श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के रंग में रंगा हुआ दिखाई दिया।

 

 

मंगल प्रवेश के दौरान नगर का वातावरण धर्ममय हो उठा। विशेष बात यह रही कि दिगम्बर एवं श्वेताम्बर समाज के साथ-साथ पूरे गांव के लोगों ने एकजुट होकर आचार्य श्री का स्वागत किया। गुरुदेव ने अपने मंगल प्रवचन में कहा, “मैं अनेक गांवों में गया हूं, किन्तु यह पहला ऐसा गांव है जहां केवल जैन समाज ही नहीं, बल्कि पूरा गांव मुनिराजों की अगवानी के लिए उमड़ पड़ा है।”

 

 

रानापुर की धर्मनिष्ठ जनता की प्रशंसा करते हुए गुरुदेव ने कहा, “रानापुर की धरती धन्य है, जहां श्रद्धा के दीप जलते हैं और संस्कारों के बीज पलते हैं। गांव तब महान नहीं होता जब उसके भवन बड़े हो जाते हैं, गांव तब महान बनता है जब वहां रहने वाले लोगों के मन बड़े हो जाते हैं।”Advertisement for Sudha Amrit mustard oil showing metal tin and assorted bottles (5 L, 2 L, 1 L, 500 ml, 200 ml) with 100% pure claim and contact number 9602091568.

 

 

अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में आचार्य श्री ने कहा कि “श्रद्धा, भक्ति और प्रेम में जो आनंद है, वह तकरार में नहीं है। मिलजुल कर रहने में जो सुख है, वह विरोध में कभी प्राप्त नहीं हो सकता।” उन्होंने सकारात्मक सोच और सद्भावना का संदेश देते हुए कहा कि सकारात्मक कार्यों के लिए कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जबकि नकारात्मकता मनुष्य की शक्ति और समय दोनों को व्यर्थ करती है।

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आचार्य श्री ने आगे कहा कि अच्छे माता-पिता, संस्कारित परिवार, उत्तम समाज, सुंदर नगर और महान देश की प्राप्ति बड़े पुण्यों का परिणाम है। भारत की संस्कृति अहिंसा, सदाचार और शाकाहार पर आधारित है, जहां चींटी से लेकर पशु-पक्षियों तक को कष्ट पहुंचाना भी पाप माना जाता है। उन्होंने सभी को करुणा, सह-अस्तित्व और सद्भावपूर्ण जीवन अपनाने की प्रेरणा दी।

 

 

प्रवचन के अंत में गुरुदेव ने कहा, “आपका व्यवहार ही आपकी वास्तविक पहचान है, अन्यथा आपके नाम के हजारों लोग संसार में मिल जाएंगे।” उनके इन प्रेरणादायी वचनों ने उपस्थित जनसमुदाय को आत्मचिंतन, संस्कार और सदाचारपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा प्रदान की।

 

 

रानापुर में हुआ यह ऐतिहासिक मंगल प्रवेश धार्मिक एकता, सामाजिक समरसता, गुरुभक्ति और भारतीय संस्कृति के जीवन मूल्यों का अनुपम उदाहरण बन गया। श्रद्धालुओं ने इसे अपने जीवन का अविस्मरणीय, प्रेरणादायी एवं पुण्यदायी अवसर बताया।

    संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

 

 

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