जीवन में जो भी परेशानियाँ, हैरानियाँ, विकृतियाँ हैं..वो सब मन की ही देन है..! प्रसन्न सागर महाराज

धर्म

जीवन में जो भी परेशानियाँ, हैरानियाँ, विकृतियाँ हैं..वो सब मन की ही देन है..! प्रसन्न सागर महाराज
अलीगंज
अन्तर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागर महाराज ने कहा की जीवन में जो भी परेशानियाँ, हैरानियाँ, विकृतियाँ हैं..वो सब मन की ही देन है..! आज मनुष्य भौतिक दृष्टि से कितना ज्यादा संपन्न है, फिर भी मानसिक रूप से दुखी और परेशान है। मनुष्य के पास इतने सुख-सुविधाओं के संसाधन है, जिनसे उसे हँसी खुशी का जीवन जीना चाहिए था। हल्का-फुल्का जीवन जीना चाहिए था। लेकिन आश्चर्य है — कि मनुष्य दर्द भरा जीवन जी रहा है, क्यों-? क्योंकि मुसीबतों में फंसा है। क्यों-? कठिनाइयों में जकड़ा है। क्यों-?हर वक्त भयभीत है। क्यों-? मनुष्य के जीवन में धर्म और अध्यात्म चूक गया है। धर्म और अध्यात्म के अभाव में, आदमी दर्द भरा जीवन जीने को विवश हो जाता है।

 

 

आचार्य श्री ने कहा धर्म और अध्यात्म की महिमा अचिन्त्य है —
संसार में सबसे कठोर पाषाण है, किन्तु पाषाण पर विजय पाने वाला लोहा हथौड़ा होता है, जो उसके टुकड़े-टुकड़े कर देता है।
उस लोहे पर विजय पाने वाली अग्नि है, जो उसे जला देती है।
अग्नि पर विजय पाने वाला जल है, जो उसे बुझा देता है।
जल से भी बलवान वायु है, जो उसे सुखा देती है।


वायु से भी अधिक बलवान मृत्यु है, जो जीवों के प्राण वायु हर लेती है।
और मृत्यु से भी बलवान धर्म और अध्यात्म है, जो मृत्यु को भी जीत लेता है।

जो अध्यात्म और आत्मा के पथ पर चलते हैं..वह अमर हो जाते हैं…!!!

नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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