दाहोद की पुण्यधरा पर संपन्न हुआ त्रिदिवसीय “अंकलीकर आनंद” महोत्सव

धर्म

दाहोद की पुण्यधरा पर संपन्न हुआ त्रिदिवसीय “अंकलीकर आनंद” महोत्सव

 

दाहोद, 20 जून 2026।

परम पूज्य मुनिकुंजर ज्येष्ठाचार्य श्री आदिसागर जी महाराज (अंकलीकर) की गौरवशाली परम्परा के दो महान संतों — सन्मति नंदन, चतुर्थ पट्टाधीश, राष्ट्रसंत, प्राकृताचार्य आचार्य श्री 108 सुनीलसागर जी महाराज एवं सन्मति गुरु के मानस शिष्य, अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महामुनिराज के दिव्य सान्निध्य में दाहोद की पुण्यभूमि पर आयोजित त्रिदिवसीय “अंकलीकर आनंद” महोत्सव श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ।

 

 

तीन दिवसीय इस भव्य आयोजन में गुरु भक्ति, धर्म प्रभावना, साधु-संघ वंदना, प्रवचन, धार्मिक अनुष्ठान तथा आत्मकल्याण के विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए। दोनों आचार्य भगवंतों के सान्निध्य में हजारों श्रद्धालुओं ने धर्मलाभ प्राप्त किया तथा संपूर्ण वातावरण धर्ममय एवं भक्तिमय बना रहा।

 

दिनांक 20 जून शनिवार को प्रातःकाल अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महामुनिराज ससंघ का दाहोद से पावन पुष्पगिरि तीर्थ (इंदौर) की ओर मंगल विहार संपन्न हुआ। विहार से पूर्व दोनों आचार्य भगवंतों का ससंघ दिव्य एवं दुर्लभ मिलन श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय क्षण बन गया। उपस्थित भक्तों ने भाव-विभोर होकर गुरुजनों से आशीर्वाद प्राप्त किया।

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 परम पूज्य आचार्य श्री 108 सुनीलसागर जी महाराज का वर्ष 2026 का पावन वर्षायोग (चातुर्मास) मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में संभावित रूप से संपन्न होगा। इस मंगल घोषणा से इंदौर एवं आसपास के जैन समाज में हर्ष और उत्साह की लहर दौड़ गई है।

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श्रद्धालुओं ने गुरुदेव के आगमन को ऐतिहासिक बनाने तथा चातुर्मास के भव्य आयोजन हेतु अभी से तैयारियाँ प्रारंभ करने का संकल्प लिया। आचार्य श्री आदिसागर जी महाराज (अंकलीकर) की गौरवशाली परम्परा के चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य श्री सुनीलसागर जी महाराज के इंदौर आगमन को लेकर समाज में विशेष उत्साह एवं उमंग का वातावरण है।

 

महोत्सव के समापन पर श्रद्धालुओं ने कहा कि गुरु का सान्निध्य जीवन को नई दिशा प्रदान करता है और उनका विहार उनके उपदेशों को जीवन में आत्मसात करने की प्रेरणा देता है।

    संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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