फालतूपन से दूरी, सार्थकता से मित्रता ही सफल जीवन का मूल मंत्र : मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज

धर्म

फालतूपन से दूरी, सार्थकता से मित्रता ही सफल जीवन का मूल मंत्र : मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज

गिरीडीह (गुणायतन) 

राष्ट्रीय संत मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने कहा कि मनुष्य का जीवन उसके विचारों, वाणी, व्यवहार और कर्मों से निर्मित होता है। यदि व्यक्ति अपने विचारों को नियंत्रित करना सीख ले, तो उसका व्यवहार संयमित होगा और व्यवहार संयमित होने पर जीवन स्वतः विशुद्ध एवं आदर्श बन जाएगा। इसलिए विचारों का संयम जीवन की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

 

 

गुणायतन में संबोधित करते हुए मुनि श्री ने कहा कि विचार मनुष्य की महान शक्ति हैं। इन्हीं विचारों के आधार पर व्यक्ति ऊँचाइयों तक पहुँच सकता है और इन्हीं के दुरुपयोग से पतन की ओर भी जा सकता है। श्रेष्ठ विचार उन्नति का मार्ग प्रशस्त करते हैं, जबकि नकारात्मक और दूषित विचार जीवन को अवनति की ओर ले जाते हैं।मुनि श्री ने कहा कि मनुष्य को फालतू विचारों, फालतू बातों, फालतू कामों और फालतू खर्चों से बचना चाहिए। निरर्थक चर्चाएँ केवल समय और ऊर्जा की बर्बादी हैं। जो लोग अपने समय का मूल्य नहीं समझते, वे व्यर्थ की बातों और कार्यों में उसे गंवा देते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे पास समय, वाणी और विचार के रूप में अमूल्य शक्ति है, जिसका उपयोग आत्मविकास, धर्म-साधना और लोककल्याण के लिए होना चाहिए।वाणी के संयम पर प्रकाश डालते हुए मुनि श्री ने कहा कि ऐसे शब्दों का प्रयोग कभी नहीं करना चाहिए जो किसी के मन को आहत करें। आक्रोशपूर्ण, अपमानजनक और आपत्तिजनक शब्द कलह एवं अशांति को जन्म देते हैं। यदि किसी को सम्मान न दे सकें तो कम से कम उसका अपमान भी न करें। कटु वचन संबंधों में गांठ पैदा करते हैं और जीवन की शांति को भंग कर देते हैं। उन्होंने प्रेरणा दी कि आवेश की स्थिति में कम बोलें और विवेकपूर्ण, मधुर तथा हितकारी वाणी का प्रयोग करें।

मितव्ययिता पर बल देते हुए मुनि श्री ने कहा कि आवश्यकता और दिखावे में अंतर समझना चाहिए। आज अनेक लोग फैशन, ब्रांड और प्रदर्शन के नाम पर अनावश्यक खर्च करते हैं। आय बढ़ने के साथ-साथ व्यय पर नियंत्रण भी आवश्यक है। महापुरुषों का जीवन सादगी, संयम और सार्वजनिक धन के प्रति उत्तरदायित्व का प्रेरक उदाहरण है। सम्मान और महानता महंगे वस्त्रों या ब्रांडेड वस्तुओं से नहीं, बल्कि चरित्र और सादगी से प्राप्त होती है।

उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपने समय का एक भाग धर्म, स्वाध्याय, ध्यान और आत्मचिंतन के लिए अवश्य निकालना चाहिए। फालतू कामों में उलझने के बजाय उपलब्ध संसाधनों का रचनात्मक उपयोग करना सीखना चाहिए। जीवन की सफलता इसी में है कि हम अपनी ऊर्जा को निरर्थकता में न गंवाकर सार्थक कार्यों में लगाएँ।Advertisement for Sudha Amrit mustard oil showing metal tin and assorted bottles (5 L, 2 L, 1 L, 500 ml, 200 ml) with 100% pure claim and contact number 9602091568.

मुनि श्री ने कहा कि यदि दिन की शुरुआत ही नकारात्मक समाचारों, व्यर्थ चिंताओं और निरर्थक चर्चाओं से होगी, तो वही नकारात्मकता हमारे विचारों और व्यवहार को प्रभावित करेगी। इसलिए जीवन में सकारात्मकता, संयम और सार्थकता को स्थान देना आवश्यक है।उन्होंने संदेश देते हुए कहा कि “फालतू से दूरी और सार्थकता से मित्रता ही सफल, संतुलित और सुखी जीवन का मूल मंत्र है।”Colorful poster advertising a print gallery with Buddha statues, saints, circular photo frames, a burger image, contact numbers, and an address at the bottom.

Smiling man with folded arms in a plaid shirt on the left; sunrise over mountains and a Hindi motivational quote on the right: 'जिनने धैर्य सीख लिया, उसने जीत का रास्ता पा लिया.'

गुणायतन मध्यभारत  राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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