• मुनिश्री सुधासागर महाराज ने पारिवारिक मूल्यों का महत्व बताया, प्रेरणादायक उद्बोधन देते हुए कहा-बिना मांगे मिला स्नेह व संस्कार सर्वोत्तम
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निर्यापक श्रमण मुनिश्री 108 सुधासागर महाराज ने रविवार को आयोजित धर्मसभा में पारिवारिक संबंधों, संस्कारों और जीवन मूल्यों पर प्रेरणादायक उद्बोधन देते हुए कहा कि माता-पिता और संतान के बीच प्रेम, विश्वास और त्याग का रिश्ता जीवन की – सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने कहा कि योग्य संतान को अपनी आवश्यकताओं के लिए बार-बार मांगने की आवश्यकता नहीं पड़ती, क्योंकि परिवार का स्नेह और विश्वास उसे स्वतः प्राप्त होता है।
मुनिश्री ने कहा कि जब पुत्र योग्य और जिम्मेदार बन जाए तो पिता को अपनी संपत्ति अथवा वसीयत बिना मांगे ही उसे सौंप देनी चाहिए। बिना मांगे प्राप्त हुई वसीयत और आशीर्वाद का महत्व कहीं अधिक होता है, क्योंकि उसमें विश्वास, स्नेह और परिवार की परंपरा का भाव निहित रहता है। उन्होंने कहा कि संतान को भी कभी माता-पिता की संपत्ति पर गलत दृष्टि नहीं रखनी चाहिए। यदि व्यक्ति की नीयत शुद्ध नहीं होती तो वह जीवन में वास्तविक सफलता और संतोष प्राप्त नहीं कर सकता।
धर्मसभा में मुनिश्री ने मां और पुत्र के संबंधों की चर्चा करते हुए कहा कि परिवार में स्नेह और संवेदनाओं का महत्व सबसे अधिक होता है। उन्होंने कहा कि जब पुत्र भोजन के लिए घर आए तो मां अथवा पत्नी को बिना मांग प्रेमपूर्वक भोजन परोसना चाहिए।
बिना मांगे दिया गया भोजन केवल पेट ही नहीं भरता, बल्कि वह आशीर्वाद और स्नेह का प्रतीक भी बन जाता है।उन्होंने कहा कि पूर्व समय में माता अपने बच्चों की हर आवश्यकता का ध्यान रखती थी और उनके प्रति चिंता एवं ममता का भाव रखती थी। बदलती जीवनशैली के कारण पारिवारिक परंपराओं में कमी आई है, जिसके कारण रिश्तों में आत्मीयता भी प्रभावित हुई है।

मुनिश्री ने सभी से परिवार में प्रेम, सम्मान और संस्कारों को जीवित रखने का आह्वान किया। मुनिश्री ने कहा कि परिवार की मजबूती केवल धन-संपत्ति से नहीं, बल्कि आपसी विश्वास, सम्मान और संस्कारों से होती है।

माता-पिता का स्नेह, त्याग और मार्गदर्शन बच्चों के जीवन को सही दिशा प्रदान करता है। वहीं बच्चों का कर्तव्य है कि वे अपने माता-पिता का सम्मान करें और उनकी भावनाओं का आदर करें। उन्होंने कहा कि जहां परिवार मेंप्रेम, सहयोग और आत्मीयता का वातावरण होता है, वहां सुख, शांति और समृद्धि स्वतः आती है। पारिवारिक मूल्यों को अपनाकर ही समाज और राष्ट्र को मजबूत बनाया जा सकता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
