शहीद बेटे को मिला कीर्ति चक्र, राष्ट्रपति से लिपटकर रो पड़ीं मां; भावुक पल में टूटा प्रोटोकॉल दिल्ली

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शहीद बेटे को मिला कीर्ति चक्र, राष्ट्रपति से लिपटकर रो पड़ीं मां; भावुक पल में टूटा प्रोटोकॉल

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राष्ट्रपति भवन में शहीद लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी को मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया। सम्मान ग्रहण करने पहुंचीं उनकी मां बेटे की याद में भावुक होकर रो पड़ीं, जिसके बाद राष्ट्रपति खुद उनके पास जाकर सम्मान प्रदान करती नजर आईं।

 

 

 

शहीद बेटे को देश का दूसरा सबसे बड़ा वीरता सम्मान मिलना था, लेकिन मंच तक पहुंचने से पहले ही मां का दर्द आंसुओं में बह निकला। बेटे की याद में फूट-फूटकर रो रही मां को देखकर राष्ट्रपति खुद प्रोटोकॉल तोड़कर उनके पास पहुंचीं और कीर्ति चक्र सौंपा। राष्ट्रपति भवन का यह दृश्य सिर्फ एक सम्मान समारोह नहीं, बल्कि एक मां के दर्द, एक बेटे के बलिदान और पूरे देश की भावनाओं का ऐसा पल था जिसने हर आंख को नम कर दिया।Advertisement for Sudha Amrit mustard oil showing metal tin and assorted bottles (5 L, 2 L, 1 L, 500 ml, 200 ml) with 100% pure claim and contact number 9602091568.

 

 

राष्ट्रपति भवन में आयोजित सम्मान समारोह में शहीद लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी को मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया। देश की सेवा में उनकी असाधारण वीरता, साहस और सर्वोच्च बलिदान को इस सम्मान के जरिए नमन किया गया। समारोह में मौजूद हर व्यक्ति इस वीर सपूत की कहानी सुनकर भावुक हो उठा।

 

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रोती मां को देख राष्ट्रपति ने तोड़ा प्रोटोकॉल

समारोह का सबसे मार्मिक पल तब आया, जब शहीद की मां नीता तिवारी सम्मान ग्रहण करने के दौरान भावुक होकर राष्ट्रपति से लिपटकर रो पड़ीं। बेटे की शहादत का दर्द उनकी आंखों से साफ झलक रहा था। यह दृश्य देखकर राष्ट्रपति भी भावुक हो गए और उन्होंने प्रोटोकॉल तोड़ते हुए खुद शहीद के माता-पिता के पास जाकर उन्हें कीर्ति चक्र प्रदान किया।

 

 

 

पीएम मोदी और राजनाथ सिंह भी हाथ जोड़े नजर आए

शहीद के माता-पिता का दर्द देखकर पूरा सभागार कुछ पल के लिए शांत हो गया। प्रधानमंत्री पीएम मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी हाथ जोड़ते नजर आए। सभा का माहौल गमगीन हो गया और वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो उठीं।

 

 

पूरे देश की आंखें हुईं नम

लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी (सिक्किम स्काउट्स) नॉर्थ सिक्किम में 22 मई 2025 को एक ऑपरेशनल गश्त के दौरान अपने एक साथी सैनिक (अग्निवीर स्टीफन सुब्बा) की जान बचाते हुए शहीद हो गए थे। उनका बलिदान देश के लिए समर्पण, साहस और कर्तव्यनिष्ठा की अमिट मिसाल है। राष्ट्रपति भवन का यह भावुक क्षण पूरे देश को याद दिला गया कि हमारे वीर जवानों और उनके परिवारों का त्याग कितना बड़ा और अनमोल है।

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