मुनिश्री आगमसाग़र जी ससंघआरंग कभी प्राचीन जैन मंदिरों का गढ़ रहा हजार साल से भी अधिक प्राचीन तीर्थंकर प्रतिमाओं के मुनियों ने किए दर्शनसंग्रहालय बनाकर संरक्षित करने का दिया संदेश

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मुनिश्री आगमसाग़र जी ससंघआरंग कभी प्राचीन जैन मंदिरों का गढ़ रहा हजार साल से भी अधिक प्राचीन तीर्थंकर प्रतिमाओं के मुनियों ने किए दर्शनसंग्रहालय बनाकर संरक्षित करने का दिया संदेश
आरंग
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगा आरंग कभी जैन समाज ओर जैन तीर्थ व जैन मंदिरों का गढ़ रहा है जगह जगह बिखरी पड़ी हैं तीर्थंकर प्रतिमाओं को संरक्षित करने संग्रहालय बनाने की यहां नितांत आवश्यकता है यह सत्य उजागर किया है आचार्यश्री विद्यासागर जी महामुनिराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि आगम सागर जी ने राजिम से पद विहार करते हुए दिगंबर जैन मुनि का जब आरंग मंगल पदार्पण हुआ तोजैन मुनियों ने प्राचीन प्रतिमाओं के दर्शन किए संग्रहालय बनाने पर दिया जोर

 

 

नयापारा राजिम से दिगंबर जैन मुनियों का तिल्दा नेवरा की ओर पद विहार चल रहा है शनिवार को जैन मुनियों का आरंग नगर में आगमन हुआ, जहां उन्होंने शनिवार को विश्राम किया। इस दौरान मुनियों ने प्रातः नगर भ्रमण कर सुप्रसिद्ध जैन मंदिर भांडदेवल सहित अन्य प्राचीन मंदिरों का अवलोकन किया और वहां स्थापित जैन प्रतिमाओं के दर्शन किए। इस अवसर पर सामाजिक संगठन पीपला फाउंडेशन के सदस्यों ने जैन मुनियों को नगर का ऐतिहासिक भ्रमण कराया।

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भ्रमण के दौरान मुनियों ने आरंग में खुले में और जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पड़ी अमूल्य प्राचीन प्रतिमाओं को भी देखा। इन दिव्य मूर्तियों की उपेक्षा पर चिंता व्यक्त करते हुए जैन मुनियों ने कहा कि यहां शीघ्र ही एक भव्य म्यूजियम (संग्रहालय) बनाकर इन प्रतिमाओं को ससम्मान स्थापित करने की अत्यंत आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इतनी दिव्य मूर्तियों का इस तरह अविनय (अनादर) होना दुखद है, जिससे नगर में नकारात्मक प्रभाव महसूस हो रहा है। इस दौरान बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग उपस्थित थे।

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भूगर्भ से निकलती रही हैं प्राचीन जैन तीर्थंकर प्रतिमाएं
आरंग में भूगर्भ ओर तालाब के आसपास हजारों साल प्राचीन जैन तीर्थंकर प्रतिमाएं मिलती रही हैं जबकि बर्तमान में आरंग में एक ही घर के जैन बचे हैं तो क्या प्राचीन काल में यह क्षेत्र जैन समाज ओर जैन तीर्थ का गढ़ रहा है

 

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आरंग में अब तक मिली हजारों साल प्राचीन दिगंबर जैन तीर्थंकर भगवान की जिन प्रतिमाओं से तो यही स्पष्ट होता है कि कभी ये जैनियों का जैन तीर्थों का जैन मंदिरों का गढ़ रहा है और जब ये जैनों का गढ़ रहा है तो फिर सवाल ये उठना लाजमी है कि प्राचीन जैन तीर्थों जैन मंदिरों का विध्वंस किसने किया यहां की जैन समाज कहां गई क्या अहिंसा प्रिय जैन समाज को उनके ही गढ़ से बाहर से आए हुए आतातायियों द्वारा भगाया गया या समाप्त किया गया इतिहास का सच सामने लाने की भी अब आवश्यकता।

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सुरेंद्र जैन रायपुर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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