आत्मचिंतन, प्रेम और संस्कारों से बनता है सुखी परिवार आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज
शामली
परम पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि आज के समय में अधिकांश लोग सुख, शांति और सुकून की खोज में लगे हुए हैं। कई लोग मानते हैं कि विशेष स्थानों पर जाने, तीर्थ यात्रा करने या भौतिक साधनों को प्राप्त करने से जीवन में शांति मिल जाएगी। निस्संदेह धार्मिक गतिविधियाँ और भक्ति मन को प्रसन्नता प्रदान करती हैं, लेकिन वास्तविक और स्थायी सुकून आत्मचिंतन, आत्मज्ञान और सही समझ से प्राप्त होता है।
जब मनुष्य स्वयं को पहचानने का प्रयास करता है और अपने भीतर झाँकता है, तभी उसे जीवन का वास्तविक आनंद प्राप्त होता है।

परिवार भी मनुष्य के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण आधार है। परिवार की खुशहाली केवल धन-संपत्ति से नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास, सम्मान और सहयोग से बनी रहती है। यदि धन बढ़ता जाए लेकिन आपसी प्रेम और संस्कार कम हो जाएँ, तो परिवार बिखरने लगता है। इसलिए जीवन में केवल पाने की इच्छा नहीं, बल्कि त्याग, समझदारी और अच्छे संस्कारों को भी स्थान देना आवश्यक है।



मनुष्य को समय-समय पर अपने व्यवहार और संबंधों का मूल्यांकन करना चाहिए
पूज्य आचार्य श्री ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि मनुष्य को समय-समय पर अपने व्यवहार और संबंधों का मूल्यांकन करना चाहिए। उसकी वाणी कैसी है, उसका स्वभाव कैसा है और वह अपने परिवार तथा समाज के लोगों के साथ किस प्रकार का व्यवहार करता है, यह उसके जीवन की दिशा तय करता है। मधुर वाणी और विनम्र व्यवहार लोगों के हृदय जीत लेते हैं, जबकि कटु शब्द संबंधों में दूरियाँ पैदा कर देते हैं।

परिवार में प्रेम और सम्मान बनाए रखने का एक सरल उपाय है एक दूसरे की अच्छाइयों की प्रशंसा करना
महाराज जी ने परिवार में प्रेम और सम्मान बनाए रखने का एक सरल उपाय बताया उन्होंने कहा
परिवार में प्रेम और सम्मान बनाए रखने का एक सरल उपाय है—एक-दूसरे की अच्छाइयों की प्रशंसा करना। अक्सर लोग दूसरों की कमियाँ देखने में अधिक समय लगाते हैं, जबकि उनके गुणों को स्वीकार नहीं करते। यदि परिवार के सदस्य एक-दूसरे के प्रयासों, सेवाओं और अच्छे कार्यों की सराहना करें, तो रिश्तों में और अधिक मजबूती आती है। एक छोटा-सा धन्यवाद, एक मधुर शब्द और सच्ची प्रशंसा परिवार में नई ऊर्जा का संचार कर सकती है।
प्रेम सहनशीलता और विनम्रता से परिवार के जीवन को मधुर बनाते हैं।
आचार्य श्री ने कहा जैसे भोजन में उचित मात्रा में नमक उसका स्वाद बढ़ाता है, उसी प्रकार प्रेम, सहनशीलता और विनम्रता परिवार के जीवन को मधुर बनाते हैं। जब घर के सदस्य एक-दूसरे के प्रति स्नेह, सम्मान और सहयोग का भाव रखते हैं, तब वही घर स्वर्ग के समान बन जाता है।
आज आत्म चिंतन की आवश्यकता है आचार्य श्री
आचार्य श्री ने कहा आज आवश्यकता इस बात की है कि प्रत्येक व्यक्ति आत्मचिंतन करे, अपने व्यवहार को सुधारे, प्रेम और भाईचारे को बढ़ाए तथा परिवार और समाज में सकारात्मक वातावरण का निर्माण करे। यही सच्चे सुख, शांति और सफल जीवन का मार्ग है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
