Older shirtless man with gray beard sitting in a bare room, touching his left ear with his right hand, looking downward. Behind him are a metal door and a window with mesh.

परम पूज्य मुनिश्री निष्पक्ष सागर महाराज के हुए केशलोच

धर्म

परम पूज्य मुनिश्री निष्पक्ष सागर महाराज के हुए केशलोच
रामगंजमंडी
परम पूज्य आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज के परम शिष्य एवम परम पूज्य आचार्य श्री 108 समयसागर महाराज के आज्ञानुवृति शिष्य परम पूज्य मुनि श्री 108 निष्पक्ष सागर ने उष्ण गर्मी के बीच रविवार की बेला में केशलोच किया।

 

केशलोच दिगंबर साधु का मूल गुण है । केशलोचन के माध्यम से शरीर से राग और मोह दूर होता है जैन धर्म अहिंसा प्रधान धर्म है बालों का लोचन अगर नहीं किए जाएं तो उसमें छोटे-छोटे जीवो की उत्पत्ति होने की संभावना होती है जैन साधु अहिंसा धर्म के महाव्रती होते हैं।

जैन साधु अपरिग्रही होते हैं। इसलिए जैन साधु अपने हाथ से केशलोचन करते हैं केश लोच से शरीर से ममत्व दूर होता है केश लोचन के समय तप,संयम, धैर्य के साथ धर्म की प्रभावना होती है जिस दिन जैन साधु केशलोच करते हैं उस दिन उपवास करते हैं।

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दिगंबर मुनि एक केशलोंच के बाद दूसरी बार केशलोंच कम से कम 2 माह और अधिक से अधिक 4 में करते है, यह इनकी तपस्या का अनिवार्य हिस्सा है। केशलोंच करते हुए मुनि घास फूस की तरह अपने हाथों से सिर, मूंछ और दाढ़ी के बालों को उखाड़ते हैं।जिससे दर्द का अनुभव नहीं होता।

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साधु शरीर की सुन्दरता को नष्ट करने और अहिंसा धर्म पालन के लिए केशलोंच करते हैं। बालों को निकालते समय कण्डे की राख का उपयोग करते हैं ताकि पसीने के कारण हाथ न फिसल जाएं और खून निकलने पर अधिक न निकले और रोग ना फैले।

 

 

दिगंबर साधू केशलोंच करते समय यह भाव रखते है कि कर्मो की निर्जरा हो रही है और पाप कर्म निकल रहे हैं जिससे दर्द का अनुभव भी नहीं होता। केशलोंच करने के पीछे एक कारण यह भी है कि साधू किसी पर अवलम्बित नहीं रहते हैं, वह स्वावलंबी होते हैं। इससे हिंसा भी नहीं होती।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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