• केशवरायपाटन क्षेत्र में हुई धर्मसभा में उमड़े समाज बंधु रुलाने और हंसाने की ताकत रखते हैं शब्द स्वास्तिभूषण माताजी केशवरायपाटन
अतिशय क्षेत्र में बुधवार को धर्मसभा हुई, जिसमें स्वस्तिभूषण माताजी ने कहा कि शब्द जड़ होने के बावजूद जीव को विचलित कर देते हैं। उन्होंने कहा कि शब्द इंसान को रुला भी सकते हैं, हंसा भी सकते हैं और क्रोध, ग्लानि व शोक जैसे भाव भी पैदा कर देते हैं।
माताजी ने कहा कि जैसे बिजली से इलेक्ट्रिक उपकरण चलने लगते हैं, वैसे ही शब्दों में आत्मा के भाव आ जाने से उनमें हलचल पैदा हो जाती है। शब्द मोह के साथ राग और द्वेष भी उत्पन्न करते हैं। इन्हीं शब्दों के माध्यम से अध्यात्म, धर्म और आचरण की बातें समझाई जाती हैं।


उन्होंने कहा कि जब तक मन बाहरी दुनिया से जुड़ा रहता है, तब तक व्यक्ति शब्दों के भावों को सही तरीके से समझ नहीं पाता। धर्म का उपदेश और शास्त्र भी शब्दों के माध्यम से ही
व्यक्त किए गए हैं, लेकिन आत्मा के सभी भावों को शब्दों में पूरी तरह व्यक्त करना संभव नहीं है।

माताजी ने उदाहरण देते हुए कहा कि जब कोई व्यक्ति लंबे समय बाद अपने प्रियजनों से मिलता है तो कई बार शब्द नहीं निकलते, लेकिन आंखों के आंसू ही भाव व्यक्त कर देते हैं। इसी तरह क्रोध में व्यक्ति हाथ उठा देता है, क्योंकि उसका भाव केवल शब्दों में व्यक्त नहीं हो पाता। वहीं प्रेम भी कई बार शब्दों से नहीं, बल्कि व्यवहार और उपहारों के माध्यम से व्यक्त किया जाता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
