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अपनी संतान को उच्चशिक्षा के साथ संवेदनशील एवं कर्तव्यनिष्ठ बनायें” : -मुनि श्री प्रमाणसागर

धर्म

“अपनी संतान को उच्चशिक्षा के साथ संवेदनशील एवं कर्तव्यनिष्ठ बनायें” : -मुनि श्री प्रमाणसागर

गिरीडीह।

मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में माता-पिता अपनी संतान को उच्च शिक्षा दिलाने और उन्हें इंजीनियर, डॉक्टर, सीए या एमबीए बनाने में अपना पूरा जीवन लगा देते हैं, लेकिन यदि उसी के साथ उन्हें संवेदनशील, कर्तव्यनिष्ठ एवं संस्कारवान बनाने का प्रयास भी किया जाए, तो परिवारों में बढ़ती दूरियाँ और तनाव कम हो सकते हैं।मुनि श्री ने कहा कि आज जीवनशैली, सोच और पारिवारिक व्यवस्थाएँ तेजी से बदल रही हैं। ऐसे समय में केवल शिकायत और अपेक्षाओं में डूबे रहने से समाधान नहीं निकलता।

 

 

 

वास्तविक शांति तब प्राप्त होती है जब माता-पिता अपने मूल दायित्व को समझते हुए संतान को आत्मनिर्भर बनाकर मोह और नियंत्रण की भावना को त्याग दें तथा जीवन को धर्म, साधना, स्वाध्याय और आत्मचिंतन की दिशा में मोड़ें।

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उन्होंने कहा कि अत्यधिक अपेक्षाएँ ही अधिकांश दुःखों का कारण बनती हैं। जब माता-पिता यह चाहते हैं कि बच्चे हर समय उनकी इच्छा के अनुरूप व्यवहार करें, तब संघर्ष उत्पन्न होता है। यदि अपेक्षाएँ सीमित हों और आत्मकल्याण की भावना जागृत हो, तो जीवन अधिक सरल और शांत बन सकता है।

प्रवचन के दौरान मुनि श्री ने जैन दर्शन के मूल सिद्धांत “अनेकांतवाद” की भी सरल एवं वैज्ञानिक व्याख्या की। उन्होंने कहा कि संसार की प्रत्येक वस्तु को केवल एक दृष्टि से नहीं, बल्कि अनेक दृष्टियों से देखने का नाम अनेकांतवाद है। किसी भी वस्तु में अनंत गुण और अवस्थाएँ विद्यमान रहती हैं। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि एक ही वस्तु किसी अपेक्षा से बड़ी भी हो सकती है और छोटी भी। इसी प्रकार आत्मा नित्य भी है और परिवर्तनशील भी।

उन्होंने स्याद्वाद की व्याख्या करते हुए कहा कि “स्यात्” का अर्थ है— “किसी दृष्टि से” या “एक अपेक्षा से”। जैसे “ग्लास आधा भरा है” और “ग्लास आधा खाली है”, दोनों कथन अपने-अपने संदर्भ में सत्य हैं। अनेकांतवाद सहिष्णुता, संवाद और समन्वय का संदेश देता है तथा यही जीवन में विवादों को कम करने का आधार बन सकता है।

मुनि श्री ने कहा कि यदि परिवार और समाज में अनेकांत की दृष्टि विकसित हो जाए तो अहंकार घटेगा, सहनशीलता बढ़ेगी और पारस्परिक संबंध अधिक मधुर बनेंगे। कार्यक्रम में ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से प्राप्त अनेक जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया।

उपरोक्त जानकारी गुणायतन मध्यभारत के प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने प्रदान की।

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