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रामगंजमंडी में दीक्षा महोत्सव : आचार्य ने बताया संयम को जीवन का रामबाण उपाय बताया

धर्म

रामगंजमंडी में दीक्षा महोत्सव : आचार्य ने बताया संयम को जीवन का रामबाण उपाय बताया

रामगंजमंडी

शहर में दीक्षा महोत्सव के दूसरे दिन की शुरुआत आचार्य के प्रवचन से हुई। दोपहर में सिद्ध चक्र पूजन का आयोजन हुआ। दीक्षार्थी की धूमधाम से बिंदौली निकाली गई। आचार्य आनंदचंद्र सागर सूरी महाराज ने प्रवचन में कहा कि पुण्य अर्जन करने योग्य है, लेकिन भरोसे योग्य नहीं। पुण्य के प्रभाव से मिलने वाले भौतिक सुख अस्थायी होते हैं। जब तक पुण्य साथ है, तब तक सुविधाएं रहती हैं। पाप उदय में आते ही जीवन ठोकरों से भर जाता है। आचार्य ने कहा कि जिसका मन शांत और पवित्र होता है, उसे भीतर से आनंद के मिलने लगता है। यही वास्तविक सुख है।

 

पदार्थों से मिलने वाला सुख स्थायी नहीं है। न वह केवल दुख की कमी मात्र है। सच्चा सुख न वही है, जिसमें कभी कमी, थकान, उदासी या शिकायत न हो। वह प्राप्त होकर फिर की कभी दूर न जाए। ऐसा सुख मात्र संयम के न मार्ग से प्राप्त हो सकता है। संयम ही जीवन का रामबाण उपाय है।

 

 

 

 

 उन्होंने कहा कि समाज और संसार की में अधिकांश समस्याएं सज्जनों की निष्क्रियता से उत्पन होती हैं। दुर्जनों की सक्रियता से नहीं। दुष्ट और स्वार्थी लोग अवसर मिलते ही पहुंच जाते हैं। इसलिए सज्जनों का सक्रिय और अग्रणी बनना आवश्यक है। उन्होंने आह्वान किया कि 5 मई को संयम की वर्षीदान यात्रा में सज्जनों का ऐसा सैलाब उमड़े कि सड़कें छोटी पड़ जाएं।

 

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मुनि चरित्रचंद्र सागर महाराज ने कहा कि आत्मनिरीक्षण करें। दीक्षा महोत्सव से अपने – जीवन में परिवर्तन लाएं। कर्म सत्ता हमें जन्म-मृत्यु के अंतहीन चक्र में नचा रही है। इस पर विजय संयम धारण करके ही प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने कहा कि साधु बनना जीवन का लक्ष्य होना चाहिए। यदि साधु नहीं बन सकते तो साधु की भक्ति, संगति और उनके गुणों को जीवन में उतारना चाहिए। गुरु के गुणों को आत्मसात करने की भावना रखें। मान-सम्मान की चाह न रखें।

 

 

मुनिश्री ने त्याग का महत्व बताते हुए कहा कि प्राप्त सुखों का त्याग कर शुरुआत करें। जो अपने अधीन सुखों का परित्याग करे, वह त्यागी है। जो धन-संपत्ति, घर-परिवार, आभूषण, दिखावा तथा बनावट छोड़ दे, वही सच्चा साधु है। वही संन्यासी है। साध्वी मुक्ति प्रिया श्रीजी ने सिद्ध चक्र पूजन का महत्व समझाते हुए बताया कि यह जिन शासन का सबसे प्रभावी और प्राचीन पूजन है। इसमें पंच परमेष्ठी, नवग्रह, 10 दिगपाल, 48 लब्धि, कई देवी-देवताओं का पूजन आता है। इससे क्षेत्र में जो अपने अधीन सुखों का परित्याग करे, वह त्यागी हैआदि, व्याधि, उपाधि से मुक्ति मिलती है। स‌द्बुद्धि, सदाचार और समृद्धि की प्राप्ति होती है। यह साढ़े 11 लाख वर्ष प्राचीन सिद्ध पूजन है।

 

 

 

 दीक्षा महोत्सव प्रवक्ता वीरेंद्र जैन ने बताया कि 4 मई को सुबह 9 बजे धर्मसागर प्रवचन मंडप में आचार्य के प्रवचन होंगे। साढ़े 10 बजे वस्त्र रंगोत्सव होगा। दोपहर 2 बजे हल्दी सेरिमनी और संयम की सौगात कार्यक्रम होगा। इसमें इंदौर की संगीतकार अदिति कोठारीप्रस्तुति देंगी। रात साढ़े 7 बजे सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन रहेगा। वहीं, 5 मई को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और शिक्षा एवं पंचायतराज मंत्री मदन दिलावर दीक्षा आयोजन के साक्षी बनेंगे। सुबह 8 बजे निकलने वाली दीक्षार्थी संयम मेहता की वर्षीदान यात्रा में शामिल होकर दीक्षार्थी का बहुमान करेंगे। 

 

 

शोभायात्रा शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए 10 बजे कंचन सिटी स्थित आगमोद्वारक नगरी पहुंचेगी। वहां आयोजित बहुमान और सम्मान समारोह में सभी अतिथियों का स्वागत किया जाएगा।

           संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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