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सब दौड़ में है — और मैं दिशा की खोज में हूँ..! अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज

धर्म

सब दौड़ में है — और मैं दिशा की खोज में हूँ..! अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज

 परतापुर बांसवाड़ा राजस्थान

अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज एवं उपाध्याय पियूष सागरजी महाराज ससंघ परतापुर बांसवाड़ा राजस्थान में विराजमान हैं  आज उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि। हमारा भारत सर्वाधिक युवाओं का देश है। युवा होने का मतलब है – जोश में होश, गति में दिशा, खान-पान में विवेक, मानवीय जीवन में नैतिक, व्यवहारिक और धार्मिकता का पुट होना। लेकिन आज हमारे देश के युवाओं को व्यसन, अर्थ और सोच की संकीर्णताओं ने हर तरह से अपाहिज कर दिया है। इसलिए – आज का युवा ना दौड़ पा रहा है, ना सही दिशा में चल पा रहा है।

 

 

 

आज नीति से कमाना और रीति से खर्च करना। जमा-खर्च, हिसाब-किताब, लेन-देन, लाभ-हानि, दान-दक्षिणा, इन सबको धर्म अध्यात्म से जोड़कर चलने से कभी नुकसान नहीं हो सकता। यदि आप किसी से धन ले रहें हो तब सोचना कि मैं इस योग्य हूं या नहीं-? और किसी को धन दे रहे हैं तो सोचना कि ये धन देने लायक है या नहीं-?

 

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ध्यान रखना — जीवन का संघर्ष जितना बड़ा होगा, सफलता उतनी ही बड़ी और कीमती होगी। जहाँ मानवीय कर्तव्य और निश्छलता है, वहीं सत्य और परमात्मा का वास समझो। लेकिन आज युवाओं की सोच में कहीं तो कुछ ना कुछ गड़बड़ है, या आज की शिक्षा में, या सामाजिक चाल-चलन में, या संस्कारों में, कहीं तो असन्तुलन या गड़बड़ी है, जिससे हमारे युवा खोखले विचारों में, उलझे और दुविधा में फंसे नजर आ रहे हैं। सच तो यही है – कि उनको इस बात से कोई मतलब नहीं है कि हमारे देश और समाज का हाल कैसा होगा-? देश का युवा कर्तव्य को कर्तव्य नहीं समझ रहा, धर्म को धर्म नहीं, घर परिवार समाज के रीति-रिवाज को पाखंड समझ रहा है। युवाओं का यह रूप बहुत निराशाजनक है। इसलिए युवाओं की गरिमामयी तस्वीर और उभरती हुई प्रतिभा धुंधली नजर आ रही है, मन कसैला हो रहा है।

 

कहने को हमारा देश – युवाओं का देश है, लेकिन इस सब पर हमारे घर, परिवार, समाज और देश के कर्णधारों को ध्यान देना होगा। क्योंकि आज हमारे देश के युवाओं का मन पढ़ाई लिखाई में नहीं, बल्कि बुरे दोस्तों की संगति में आवारागर्दी, नशा, अधैर्य कामुकता, गाली-गलौच, बहन-बेटियों पर फब्तियां कसना, इन्टरनेट का गलत इस्तेमाल करना, और दिन भर उसी में रमे रहना आदि, कई तरह के अवगुण आज के युवा अपना चुके हैं। आज का युवा दिशा विहिन होकर अपने माता-पिता का पैसा बर्बाद कर रहा है। ऐसे दिशा विहिन युवा अपने माता-पिता और गुरूजनों का सम्मान भी नहीं कर पा रहे हैं।

सौ बात की एक बात – युवाओं के भीतर एक जुनून होता है, जिसको सिर्फ सही दिशा देने की जरूरत है…!!!

 

नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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