* *न्याय नीति से कमाया गया धन दान के योग्य है* सुरेश चंद्र गांधी नौगामा जिला बांसवाड़ा राजस्थान की रिपोर्ट —————– नोगामा
परम पूज्य आचार्य श्री 108विभव सागर जी महाराज की शिष्या आर्यिका 105 सिद्धमति माताजी संघ सहित नौगामा नगर में विराजमान है प्रतिदिन प्रातः शांति धारा अभिषेक के बाद इष्टोंपदेश के माध्यम से मंगल प्रवचन का लाभ धर्म प्रेमी बंधु ले रहे हैं। माताजी ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि यदि कोई व्यक्ति तन पर कीचड़ लेपता फिर कर लूं स्नान इस प्रकार की जिसकी बुद्धि हो वह वास्तविक काम नहीं है पहले लूट पाट से धन कमाता है अनीति से धन कमाता है और फिर कहता है मैं इसको दान कर दूं तो मुझे पुण्य मिलेगा वह उसकी गलत सोच है उसे कोई फायदा नहीं मिल सकता है न्याय नीति से कमाया गया धन ही वास्तविक दान का कारण है।
इसलिए हमें अपने धन का उपार्जन न्याय से नीति से और भक्ष आदि सामग्री के माध्यम से ही धन उपार्जन करना चाहिए वही दान देना चाहिए उसकी ही जीवन में सार्थकता है अन्यथा वह पाप का ही कार्य है।





शाम को आचार्य भक्ति के बाद जैन पाठशाला के छात्रों को जीवन में संस्कारवान होने का मार्ग बताया,
