विषय भोगों से उपयोग हटाकर शास्त्र का स्वाध्याय कर ज्ञान वर्धित करें आचार्य श्री वर्धमान सागर जी
जयपुर
प्रथमाचार्य श्री शांति सागर महाराज की परंपरा के पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधि 108 आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का विहार जयपुर नगर में चल रहा है सेठी कॉलोनी में रात्रि विश्राम के बाद 29 मार्च को प्रातः बिहार करआचार्य संघ 35 पीछी का मंगल प्रवेश चौकड़ी दिगंबर जैन मंदिर पाटौदी मोदीखाना में मंगल आगमन हुआ।विहार के समय श्रद्धालुओं ने स्थान स्थान मंगल आरती की मंदिर समिति ने आचार्य श्रीवर्धमान सागर जी के चरण प्रक्षालन कर आरती की। जिनालय में दर्शन के बाद आयोजित धर्म सभा में मुनिश्री हितेंद्र सागरजी ने कहा कि मंदिर में बेदी के सौंदर्य के साथ प्रतिमा भी सुंदर मनोज्ञ हैं। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने धर्म देशना में बताया कि मंदिर में श्री जी के दर्शन अभिषेक पूजन भक्ति और श्रद्धा से करने पर ही पुण्य का अर्जन होता है सन 1969 में दीक्षा गुरु के साथ इस जिनालय के 57 वर्ष पूर्व दर्शन किए थे, आचार्य बनने के बाद पहली बार दर्शन कर रहे हैं ।इस जिनालय का निर्माण जयपुर शहर के समकालीन है ।श्रीजी की महिमा अपरंपार है यह जिनालय तीर्थ के समान है।राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य श्री ने आगे बताया कि भगवान भी जन्म लेने के बाद दीक्षा लेकर तपस्या के माध्यम से कर्मों को नष्ट कर सिद्ध अवस्था को प्राप्त कर भगवान बनते हैं यहां जिनालय में पारसनाथ की प्रतिमा में नीचे दो सर्प निर्मित हैं जो रक्षक यक्ष यक्षिणी धरणेंद और पद्मावती है।इन्होंने भगवान का उपसर्ग दूर किया। भगवान तपस्या के द्वारा ज्ञान में वृद्धि कर केवल ज्ञान प्राप्त करते हैं आप सभी को भौतिक भोग उपभोग की सामग्री से मन उपयोग हटाकर शास्त्र स्वाध्याय से ज्ञान मे वृद्धि करना चाहिए। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी एवं आचार्य श्री प्रज्ञा सागर जी संघ सान्निध्य में वर्तमान शासन नायक श्री महावीर स्वामी का जन्मोत्सव मनाया जाएगा
राजेश पंचोलिया इंदौर
