रामगंजमंडी में पुनः मुनिद्वय का हुआ मंगल प्रवेश हाड़ौती की धरती तोड़ने वाली नहीं जोड़ने वाली है निष्पक्ष सागर महाराज

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रामगंजमंडी में पुनः मुनिद्वय का हुआ मंगल प्रवेश हाड़ौती की धरती तोड़ने वाली नहीं जोड़ने वाली है निष्पक्ष सागर महाराज
रामगंजमंडी

परम पूज्य आचार्य श्री 108विद्यासागर जी महाराज की परम्परा में साधना कर रहे तथा आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के आशीर्वाद से तप-आराधना कर रहे पूज्य मुनि श्री 108 निष्पक्षसागर जी महाराज एवं पूज्य मुनि श्री 108 निस्पृहसागर जी महाराज का सोमवार की प्रातः रामगंजमंडी में मंगल प्रवेश हुआ। मुनिद्वय के आगमन को लेकर जैन समाज सहित नगर के श्रद्धालुओं में अत्यंत हर्ष और उत्साह का वातावरण बना हुआ था।

 

 

मुनिद्वय हाल ही में रामगंजमंडी से विहार कर चंद्रोदय तीर्थ चांदखेड़ी पधारे थे, जहां भगवान श्री 1008 आदिनाथ जन्म कल्याणक महोत्सव के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय भव्य धार्मिक कार्यक्रमों में उन्होंने श्रद्धालुओं को धर्मोपदेश प्रदान किया और धर्म प्रभावना की।

महोत्सव के कार्यक्रम सम्पन्न होने के पश्चात अब मुनिद्वय का पुनः रामगंजमंडी आगमन हुआ। प्रातः बेला में स्माल स्केल स्टोन इंडस्ट्री भवन कुदायला से मंगल विहार करते हुए नगर की सीमा पर स्थित कमल फिलिंग स्टेशन पैट्रोल पंप पर समाज बंधुओ ने उनकी मंगल अगवानी की। यहां पहुंचने पर कमल कुमार जैन लुहाड़िया एवं एवं परिवार सहित समाज बंधुओ ने गुरुदेव की मंगल आगवानी करते हुए पद प्रक्षालन कर मंगल आरती की।

 

इसके पश्चात मुनिश्री का नगर में शोभायात्रा के साथ भव्य मंगल प्रवेश हुआ हाथों में पंचरंगा ध्वज लिए युवा महिलाएं मस्तक मंगल कलश लिए हुए जय जयकार करते हुए चल रही थी। जगह जगह मुनि संघ का पद प्रक्षालन मंगल आरती करते हुए मंगल अगवानी की गई। नगर के प्रमुख मार्गो से होते हुए उन्हें शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर लाया गया। जहां मंदिर के प्रवेश द्वार पर मुनि संघ की महिला शक्ति ने मस्तक पर मगंल कलश धारण कर परिक्रमा की। उसके उपरांत मंदिर में धर्मसभा हुई धर्मसभा का संचालन धर्मेंद्र लुहाड़िया शोभित जैन ने किया इस अवसर पर सर्वप्रथम आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन किया गया। आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के पूजन पश्चात मंगलाचरण दीवा जैन ने किया।

 

इस अवसर पर सर्वप्रथम मुनि श्री 108 निष्प्रह सागर महाराज ने मंगल प्रवचन में कविता अंदाज में कहा कि मन मचल मचल जाता है जब भक्ति उछलकर जाती है, चेहरे पर क्या अधरों पर मुस्कान तैर जाती है, जब पुण्य लौट लौट कर आता है। आचार्य श्री ने कहा कि भक्ति ही हमें मजबूर कर देती है लौटने के लिए रामगंजमंडी के विषय में गुरुदेव ने कहा कि रामगंज मंडी का पुण्य तीव्र गति से जागेगा नहीं सोचा था। भगवान से मांगो मत भक्ति करो।

इस अवसर पर परम पूज्य मुनि श्री 108 निष्पक्ष सागर महाराज ने भी अपने मंगल प्रवचन देते हुए कविता अंदाज में कहा कि गुरु के प्रसाद से ही भक्त गुरु की कृपा पाते हैं जो लोग गुरु की भक्ति पागलों की तरह करते हैं उन पर गुरु की रहमत बरसती है बादलों की तरह।

महाराज श्री ने कहा कि हाडोती की धरती जोड़ने वाली है तोड़ने वाली नहीं राजस्थान में हाडोती उत्तम व्यवस्थित छोटा सा हिस्सा है जो दोनों संस्कृति का समन्वय है एक और मालवा मध्य प्रदेश और हाडोती।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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