मरुधर मणि युगदिवाकर खरतरगच्छाधिपति आचार्य श्री जिन मणिप्रभ सूरीश्वरजी म.सा. को राष्ट्रीय रत्न की उपाधि से अलंकृत किया गया
रामगंजमंडी।
जैन श्वेताम्बर समाज के 66 वर्षीय मरुधर मणि युग दिवाकर, खरतरगच्छाधिपति जैसी उपाधि प्राप्त आचार्य जिन मणिप्रभ सूरीश्वर म.सा. को राजस्थान एवं महाराष्ट्र की सरकारों ने ‘राष्ट्रीय रत्न’ की उपाधि से अलंकृत करके पूरे जैन समाज को गौरवान्वित किया है।
श्रीआदिनाथ जैन श्वेताम्बर श्रीसंघ ट्रस्ट अध्यक्ष राजकुमार पारख ने बताया कि जैन समाज के प्रथम दादा गुरुदेव आचार्य जिनदत्त सूरीजी का 871 वर्ष पूर्व देवलोक गमन हुआ था। अग्नि संस्कार में पूज्य प्रथम दादा गुरुदेव की काया तो जल गई, लेकिन उनकी ओढ़ी हुई चादर, चोल पट्टा एवं मुख पत्ती जो कपड़े की थी वह नहीं जली। वर्षों पहले जैसलमेर में महामारी आई और लोग मरने लगे, उस वक्त के वैद्य नीम हकीमों से ईलाज नहीं हो पाया तब गुजरात के पाटन में सुरक्षित रखी हुई प्रथम दादा गुरुदेव की चादर को जैसलमेर लाया गया और उसे गीला करके सभी जगह छिटका गया, बीमारी अपने आप गायब हो गई। उसी चादर का 871 साल बाद पुन: अभिषेक का कार्यक्रम दिनांक 6 से 8 मार्च तक जैसलमेर में पूज्य गुरुदेव मणिप्रभ सूरीश्वरजी म.सा. की पावन निश्रा में हजारों लोगों की उपस्थिति में हुआ।

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के राष्ट्रीय प्रमुख मोहन भागवत, केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत सहित अनेक सांसद व विधायक इस कार्यक्रम में शरीक हुए। वही महाराष्ट्र के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा इस कार्यक्रम के संयोजक बने। “8 मार्च का दिन पूरे जैन समाज को गौरवान्वित करने वाला रहा :-” इस दिन राजस्थान की सरकार एवं महाराष्ट्र की सरकार ने पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री जिन मणिप्रभ सूरीश्वर जी म.सा. को राष्ट्रीय रत्न की उपाधि से नवाजा। पद उद्घोषक माननीय हरिभाऊ किसानराव बागडे, राज्यपाल महोदय राजस्थान सरकार ने घोषणा की कि आचार्य मणिप्रभ सूरीश्वर जी ने बाल्यावस्था में अपने संयम जीवन कर 52 वर्षों से राष्ट्र, समाज और शासन हेतु हजारों किलोमीटर का पैदल विहार कर सामाजिक कुरीतियों, सामाजिक एकता, स्कूलों की स्थापना, विहार धामों की स्थापना के साथ-साथ 300 जिन मंदिरों की प्रतिष्ठा, 160 आत्माओं को संयम दान किया और अनेक पुस्तकों का संपादन कर समाज के हर पहलू को हुआ।

इसलिये आपको राष्ट्र रत्न की उपाधि से अलंकृत किया जाता है। श्री संघ अध्यक्ष राजकुमार पारख ने कहा कि अब गुरुदेव राष्ट्र रत्न संत बन गये हैं। दादा गुरुदेव की साधना को चादर महोत्सव के द्वारा जन-जन तक पहुँचाने जैसलमेर में आयोजित इस विशाल महोत्सव में भारत भर के समस्त संघ पधारे।

:- रामगंजमंडी श्री संघ से सुभाष बापना, विजय कुमार छाजेड़, वीणा बापना, साक्षी पारख, प्रखर पारख, गौरव बापना, रवि बापना, दिलीप तिल्लानी, राजेन्द्र रांका, मिली रांका, सोनिका गांधी, रितुल रांका, चादर महोत्सव में भाग लेने गये।

:- पूरे विश्व में 7 मार्च को एक करोड़ आठ लाख गुरु इकतीसे के पाठ हुए
राष्ट्र रत्न संत आचार्य श्री जिन मणिप्रभ सुरीश्वर जी म. सा. के आह्वान पर 7 मार्च को जैन अजैन लोगों ने एक करोड़ आठ लाख दादा गुरुदेव के इकतीसे का पाठ किया। रामगंजमंडी में भी श्री जिन कुशल सुरी दादाबाड़ी में 7 मार्च को 11.45 बजे से 12.39 बजे तक ट्रस्ट अध्यक्ष राजकुमार पारख, सुरेन्द्र रांका, सुशील गोखरू, धरमचंद साखलेचा, ज्ञानचंद डांगी, राजेश लोढ़ा, मनीष जैन, गजेन्द्र छाजेड़, कमल छाजेड़, संतोष चोपड़ा, प्रदीप तिल्लानी, संदीप मोरावाल, पुरुषोत्तम मोरावाल, सुरेन्द्र बापना, अक्षत डांगी, राजुल चत्तर, कीर्ति मोरावाल, मधु राजेन्द्र डांगी, शिखा डांगी, चंदा मोरावाल, शशि बापना, पदमा डांगी, सुनीता सखलेचा, ललिता सखलेचा सहित अनेक समाजजनों ने गुरु इकतीसे का पाठ किया।


:- रामगंजमंडी की प्रतिष्ठा करवाने के लिए जैसलमेर से विहार:-
रामगंजमंडी के बाजार नं. 3 में बन रहे भगवान आदिनाथ मंदिर की प्रतिष्ठा राष्ट्र रत्न संत आचार्य श्री जिन मणिप्रभ सुरीश्वर जी म. सा. के कर कमलों से होगी। यह रामगंजमंडी के सकल जैन समाज के लिये बहुत ही गौरव की बात है। अध्यक्ष राजकुमार पारख ने बताया कि पूज्य गुरुदेव ने 9 मार्च को जैसलमेर से रामगंजमंडी के लिए विहार शुरू कर दिया। वहीं रामगंजमंडी में पूज्य गुरुदेव के आगमन पर स्वागत, अभिनंदन के बड़े-बड़े होर्डिंग लगने की होड़ सी दिखाई दे रही है।”
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
