जैन समाज में नारी सशक्तिकरण, एक प्राचीन परम्परा :-
मनोज कुमार जैन बांकलीवाल
आज जब सम्पूर्ण विश्व अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मना रहा है, तब यह स्मरण करना अत्यंत महत्वपूर्ण है कि नारी सम्मान और नारी सशक्तिकरण की भावना हमारे जैन धर्म में प्राचीन काल से ही विद्यमान रही है। जैन दर्शन में नारी को केवल सम्मान ही नहीं दिया गया, बल्कि उसे ज्ञान, साधना और आध्यात्मिक उन्नति के समान अवसर प्रदान किए गए।


जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) ने मानव सभ्यता को अनेक कलाएँ और जीवनोपयोगी विद्या प्रदान कीं। जहां पुरुषों के लिए उन्होने 64 कलायें बतायीं वहीं नारीयों के लिए 72 कला, उसी परम्परा में उन्होंने अपनी पुत्री ब्राह्मी को लेखन विद्या का ज्ञान दिया, जिसके आधार पर आगे चलकर ब्राह्मी लिपि का विकास हुआ। इसी प्रकार दूसरी पुत्री सुंदरी को गणित की शिक्षा प्रदान की। यह तथ्य दर्शाता है कि उस समय भी नारी को ज्ञान और शिक्षा में समान अधिकार दिया गया था।
इतना ही नहीं, बाद में ब्राह्मी और सुंदरी दोनों ने सांसारिक जीवन का त्याग कर आध्यात्मिक मार्ग अपनाया और भगवान आदिनाथ के संघ में प्रथम आर्यिका (जैन साध्वी) के रूप में प्रतिष्ठित हुईं। यह घटना स्पष्ट करती है कि जैन धर्म में नारी को आध्यात्मिक साधना और मोक्षमार्ग में भी समान अवसर प्राप्त थे।
इसी परम्परा को आगे बढ़ाते हुए जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी ने भी नारी शक्ति को सम्मान दिया। उनके जीवन में चंदनबाला का प्रसंग अत्यंत प्रेरणादायक है। भगवान महावीर ने चंदनबाला को दीक्षा प्रदान कर उन्हें संघ की प्रथम आर्यिका के रूप में प्रतिष्ठित किया और हजारों साध्वियों के विशाल संघ का नेतृत्व करने का अवसर दिया।


इन ऐतिहासिक उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि जैन धर्म में नारी सशक्तिकरण कोई आधुनिक विचार नहीं, बल्कि हजारों वर्षों से हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग रहा है। ज्ञान, साधना, त्याग और आध्यात्मिकता के क्षेत्र में नारी ने जैन समाज में सदैव महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
आज महिला दिवस के अवसर पर हमें इस गौरवशाली परम्परा को स्मरण करते हुए यह संकल्प लेना चाहिए कि हम समाज में नारी को सम्मान, शिक्षा और आगे बढ़ने के समान अवसर प्रदान करें।
नारी शक्ति का सम्मान ही समाज की वास्तविक उन्नति का आधार है।
— मनोज कुमार जैन बांकलीवाल आगरा से प्राप्त आलेख
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
