“भूख के वक्त कुछ दिखाई नहीं देता… लेकिन भूखा पेट बहुत कुछ दिखा देता है।” आचार्य श्री प्रसन्न सागर महाराज
नीमच
आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर महाराज ने कहा कि इस वसुंधरा पर दो प्रकार के लोग हैं—जो जीने के लिए भोजन करते हैं।जो खाने के लिए जीते हैं।जो जीने के लिए खाते हैं, वे संयमित रहते हैं—दिन में दो बार, स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए।और जो खाने के लिए जीते हैं, वे स्वाद के पीछे भागते हैं—दिनभर चटपटे आहार में लिप्त रहते हैं और अंततः चिकित्सालयों के चक्कर लगाते हैं।
आधुनिक खान-पान: सुविधा या संकट?आज का युग फास्ट फूड और प्रोसेस्ड फूड का युग बन चुका है।पैक खोलो, गर्म करो और खा लो—यह सुविधा दिखती है, पर भीतर छिपा है स्वास्थ्य का संकट।बार-बार भोजन करने से इंसुलिन स्तर बढ़ता है।मस्तिष्क का तृप्ति केंद्र मंद पड़ जाता है।असली भूख समाप्त होकर आदत बन जाती है—“चटर-पटर” की।परिणाम—मोटापा, मधुमेह, रक्तचाप और अनेक रोग कुकुरमुत्तों की तरह बढ़ते जा रहे हैं।


आचार्य श्री ने स्मरण कराया—
50 वर्ष पूर्व का जीवन देखें—दो समय सादा भोजन, 6–8 घंटे की नींद, और रोग न्यूनतम।आज सुविधा अधिक है, पर स्वास्थ्य कम।




सात्विकता और संयम: स्वस्थ जीवन का मूलमंत्र
सात्विक भोजन शरीर को ऊर्जा,मस्तिष्क को ताजगी,और आत्मा को आत्मविश्वास देता है।स्वस्थ जीवन का सूत्र है—भोजन में संयम।“भूख एक बीमारी है, भोजन उसकी औषधि है।”भोजन को औषधि समझकर ग्रहण करें, ताकि दवाखाने न जाना पड़े।जो भोजन को दबाकर खाते हैं, वे अंततः दवा खाते हैं।
आचार्य श्री ने प्रेरणा दी—
केवल 7 दिन का संयम अभ्यास,और प्रत्येक मास एक उपवास,
जीवन को हजारों रोगों से बचा सकता है।
पदविहार की मंगल सूचना
अहिंसा संस्कार पदयात्रा अब मध्यप्रदेश से राजस्थान की ओर अग्रसर है—नीमच – प्रतापगढ़ – घाटोल – बांसवाड़ा – परतापुर (अद्वेश्वर पार्श्वनाथ)भव्य मंगल पदविहार दिनांक: 2 मार्च 2026, सोमवारप्रातः 6:30 बजे राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, मेलाना (तहसील निम्बाहेड़ा, जिला चित्तौड़गढ़)से श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, जावद (जिला नीमच, मध्यप्रदेश)दूरी: 11 किलोमीटरयह पदयात्रा केवल चरणों का प्रवास नहीं,बल्कि संयम, स्वास्थ्य और आत्मजागरण का संदेश है।आइए—भोजन को भोग नहीं, योग बनाएं।संयम को अपनाएं, स्वास्थ्य को सजाएं।
— नरेंद्र अजमेरा पियूष कासलीवाल, से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
