उत्कृष्ट तपस्वी मुनिश्री चन्द्रप्रभ सागर महाराज के 23 वे दीक्षा दिवस पर भाव भीनी विनायजली
विश्व वंदनीय आचार्य श्री विद्यासाग़र महाराज के परम प्रभावक शिष्य उत्कृष्ट तपस्वी मुनि श्री चन्द्रप्रभ साग़र महाराज का 23 वा मुनि दीक्षा दिवस मना रहे है। यदि उनके जीवन कृतित्व पर हम प्रकाश डाले तो सचमुच तपस्या से भरा है। मुनि श्री एक आहार एक उपवास की साधना करते है। आपकी निष्प्रहता को देख हर कोई चकित सा हो जाता है। तप संयम की प्रतिमूर्ति है। आपने 2 बार सिंहनिष्क्रडित व्रत तप साधना है। पूज्य मुनि श्री ने जब मुनि दीक्षा ली तब ही उन्होंने आचार्य श्री से एक आहार एक उपवास का नियम लिया। 23 वर्षो के मुनि जीवन में यह क्रम जारी है। आपने न्यायाशीश की परीक्षा को उत्तीर्ण किया लेकिन उन्होंने इस मार्ग को छोड़ संयम तप त्याग मुक्ति को मार्ग को चुना।
एक परिचय मुनि श्री का

पूर्व का नाम-शशिकांत केम्प्राणे (जैन)
पिता का नाम-श्री धनपाल केम्प्राणे (जैन)
माता का नाम-श्रीमाती रलमाला केम्प्राणे (जैन)
जन्म दिनांक/तिथि/ 1-6-1966 बुधवार, ज्येष्ठ शुक्ल 13 वि.सं. 2023
नेज, तह.-चिकोड़ी, जिला-बेलगांव (कर्नाटक)ग्राम में हुआ
शिक्षा (लौकिक/बार्मिक):एम..कॉम., एल.एल.बी.
बह्मचर्य व्रत- आपने संयम पथ पर कदम बढ़ाते हुए 13-10-1996 को, श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र महुआ (गुजरात) आजीवन ब्रहचर्य व्रत को लिया और मुक्ति के पथ पर अग्रसर हो गए। समय आया 22-04-1999, गुरूवार वैशाख शुक्ला सप्तमी को जब उन्हें सर्वोत्कृष्ट पद मुनि दीक्षा आचार्य श्री विद्यासाग़र महाराज ने श्री
दिगम्बर जैन रेवातट सिद्धोदय सिद्ध क्षेत्र नेमावर जिला-देवास (म.प्र.)प्रदान की।
यह राजस्थान की हाड़ौती माटी का पावन पुण्य रहा जो उनका सानिध्य मिला विशेषकर रामगंजमडी,भवानीमंडी,पिड़ावा को मिला। पूज्य मुनि श्री करुणा,क्षमा, त्याग की जीवंत प्रतिमूर्ति है। यही कामना करते है आपका रत्नत्रय और व्रद्धि की औऱ बढे।
दीर्घायु हो पुर्णायु हो
आप चिरायु हो
हम सबकी भी उम्र लग जाए आप शतायु हो।
अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी
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