चौबीस वर्ष वाद अशोक नगर की बेटी साध्वी बनकर आयेंगी
आर्यिका संघ का पिपरई से अशोक नगर की ओर हुआ विहार
कठिन तो है लेकिन मार्ग यही है–आदर्शमति माताजी
अशोक नगर-
-जैनचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज की परम शिष्या आर्यिका रत्न श्री आदर्श मति माता जी आर्यिका श्री दुर्लभ मति माता जी ससंघ बारह आर्यिका माताजी मुंगावली से विहार करते हुए शनिवार पिपरई ग्राम पहुंचा। जहां पिपरई जैन समाज ने आर्यिका संघ की अगवानी की इस दौरान आर्यिका संघ की आहार चर्या नगर में हुईं। शाम को आर्यिका संघ ने अशोक नगर की ओर विहार कर दिया
आचार्य श्री से सबसे छोटी उम्र में दीक्षा लेने का सौभाग्य मिला

मध्यप्रदेश महासभा के संयोजक विजय धुर्रा ने बताया कि अशोक नगर की माटी में जन्मी पली बढ़ी हुई आर्यिका श्री अंर्घ मति माता जी चौबीस वर्षों बाद अपने नगर में ग्रीष्म कालीन वाचना हेतु पधार रहीं हैं। आर्यिका संघ कुंडलपुर महा महोत्सव उपरान्त इतनी भीषण गर्मी में निरन्तर पद विहार कर रहा है।

एक परिचय आर्यिका श्री अंर्घ मति माता जी का
अशोक नगर के श्रावक श्रेष्ठी राधेलाल जी धुर्रा के घर जन्मी आर्यिका श्री अंर्घ मति माता जी ने आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के कर कमलों से सन1992मे जैनेश्वरी आर्यिका दीक्षा ग्रहण की। वे सौ से अधिक शिष्यों में सबसे कम उम्र में 17वर्ष आठ माह में दीक्षा लेने वाली पहली शिष्या है।माताजी के ग्रहस्थ जीवन के भाई मध्यप्रदेश महासभा संयोजक विजय धुर्रा ने बताया कि सन 1987 थूबोनजी चातुर्मास में परिवार द्वारा तीर्थ क्षेत्र पर निरन्तर चौंका लगाने और संत समागम के प्रभाव से छोटी बहन अंजना दीदी को वैराग्य हो गया। और मात्र तेरह साल की उम्र में घर छोड़ दिया।दीक्षा के पहले ही ब्रह्मी विद्या आश्रम में कठिन साधना करते हुए आचार्य श्री की नजरों में आने पर सन 1992मे कुडलपुर सिद्ध क्षेत्र में सत्रह आर्यिका माताजी के साथ जैनेश्वरी दीक्षा हो गई।
सोमवार को होगी भव्य आगवानी
इसके बाद सन1998 में अशोक नगर चातुर्मास हुआ तब से अब पहली बार ग्रीष्म कालीन वाचना हेतु संघ के सोमवार को सुबह अशोक नगर प्रवेश की प्रबल सम्भावना है। जहां जैन समाज द्वारा आर्यिका संघ की भव्य आगवानी की जायेगी।
थूबोनजी कमेटी ने कियाश्री फल भेंट
इसके पहले मुंगावली पहुंच कर थूबोनजी कमेटी ने आर्यिका रत्न श्री आदर्श मति माता जी ससंघ को श्रीफल भेंट कर पिपरई होते हुए अतिशय क्षेत्र दर्शनोंदय तीर्थथूवोनजी पधारने का निवेदन किया। कमेटी के महामंत्री विपिन सिघई ने बताया कि पिपरई से दर्शनोंदय तीर्थ थूबोनजी की दूरी मात्र बीस किलोमीटर है। और पैदल विहार का सुगम मार्ग है। इस मार्ग से पूर्व में भी साधु सन्तों का थूबोनजी पदार्पण हुआ है। कमेटी के प्रचार मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि माता जी पिपरई मुंगावली सहित पूरे अंचल के भक्तों की आस्था थूबोनजी के खड़े बाबा आदिनाथ भगवान के चरणों में है।और रोज यहां भक्त पहुंच कर भक्ति का आनंद लेते हैं।वर्षों वाद आपका आगमन हो। इस हेतु थूबोनजी कमेटी निवेदन लेकर आई है।
मंजिल पाने के लिए कदम कदम आगे बढ़ना होगा
इस दौरान आर्यिका रत्न श्री आदर्श मति माता जी ने कहा कि मार्ग तो यही है, कठिन अवश्य हो सकता है। मंजिल पाने के लिए कदम सही बढ़ना तो पड़ेगा ही। इसलिए साधक धीरे धीरे ही सही मंजिल की ओर कदम बढ़ाते रहते रहते हैं। और राह में आने वाले भक्तों और श्रद्धा लुओ का मार्ग में दर्शन भी करते रहते है। आज तक किसी को बिना चलें मंजिल नहीं मिली। और आगे भी मिलने वाली नहीं है। ये आकांट्य सिद्धांत है। इसलिए ये दुर्लभ मनुष्य पर्याय मिली है इसका सभी को सदुपयोग कर लेना चाहिए।
संकलित अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी
