परम पूज्य आर्यिका श्री शीतल मति माताजी का यम संलेखना में 31 जनवरी को 9 वा उपवास पूर्वक आचार्य संघ सानिध्य में सम्यक समाधि मरण
निवाई
प्रथमाचार्य श्री शांतिसागरजी की अक्षुण्ण मूल बालब्रह्मचारी पट्ट परम्परा के आचार्य कल्प श्री श्रुत सागर जी की सुशिष्या पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधी 108 आचार्य श्री वर्धमान सागरजी संघस्थ 83 वर्षीय आर्यिका श्री शीतलमति जी ने 54 वे वर्ष के माघ शुक्ला पंचमी 23 जनवरी 2026 को चारों प्रकार के आहार का त्याग कर यम संलेखना धारण की । दिनांक 31 जनवरी कों आपका 9 वा उपवास में आचार्य श्री वर्धमान सागर जीके श्री मुख से अरिहंत सिद्ध श्रवण करते हुए पूर्ण चेतना में दिनांक 31 जनवरी शाम को सम्यक समाधि मरण हो गया।आपकी विमान डोल कल 1 फरवरी 2026 को निकलेगी।
सकल दिगम्बर जैन समाज निवाई
वात्सल्य वारिधी भक्त परिवार
