चांदखेड़ी के बाबा का चमत्कार छोटा-मोटा नहीं है। निर्मोह सागर महाराज
चांदखेड़ी
परम पूज्य निर्यापक श्रमण मुनिश्री 108 योगसागर महाराज संघ सानिध्य में भगवान आदिनाथ का अभिषेक शांति धारा संपन्न हुई। इसके उपरांत संघस्थ मुनिराज मुनि श्री 108 निर्मोह सागर महाराज ने क्षेत्र के प्रति अपनी पुरानी स्मृति को साझा करते हुए कहा कि लगभग 25 साल बाद इस क्षेत्र पर आना हुआ है। जब वर्ष 2002 यहां पर प्रतिमा निकाली गई थी तब हम यहां दर्शन के लिए आए थे। उस समय काफी भीड़ थी और उस समय काफी परेशानियां भी थी, और उस समय हमने भगवान के समक्ष यह भावना भाई थी कि भगवान हम जब भी आपके दर्शन करेंगे आप जैसे बनकर ही करेंगे। वह भाव आज से कम से कम 25 वर्ष पहले किया था और जब यहा आगमन हुआ तब बार बार वही बात याद आ रही थी, आपके दरबार में जो बात हमने रखी थी वह पूर्ण हो गई। ऐसा योग मिला यहां पर आने के कोई योग नहीं था लेकिन योगसागर जी के साथ ऐसा योग मिल गया भगवान के दर्शन हमें दिगंबर अवस्था में हो गए।
अतिशयकारी भगवान आदिनाथ के विषय में महाराज जी ने कहा कि यहां के दरबार का और आदिनाथ भगवान का बाबा ऐसा चमत्कार है कि हमने जो बात रखी थी खुद ने नहीं रखी किसी दूसरे के द्वारे रखवाई वह पूर्ण हो गई।


जब हमने अपने मस्तक को बाबा के चरणों में रखा तो ऐसा लगा जो बोझ हम पर था वह सारा का सारा बोझ उतर गया हो। अपने आपको इतना हल्का महसूस हुआ कि उन्होंने आदिनाथ भगवान की प्रतिमा को अतिशयकारी बताया और कहा कि हम जितनी देर यहां पर बैठते हैं उतनी ही देर हमें विशुद्धि का अनुभव होता है। इस प्रतिमा के दर्शन करके हमेशा लगता है कि यह प्रतिमा हमसे कुछ कहना चाहती हो। उन्होंने कहा मैं अपने मन से नहीं कह रहा हूं जो मैने यहां बैठकर अनुभूति की है वह कह रहा हूं।



चांदखेड़ी के बाबा का चमत्कार छोटा-मोटा नहीं है आप तो मन से भी एक बार स्मरण कर लेंगे तो आपके सब काम पूर्ण हो जाएंगे।
जैसे हम भगवान को स्मरण करते हैं वैसा ही स्मरण आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज का भी करें
उन्होंने आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के विषय में कहा कि हमें पंचम काल में अरिहंत तो नहीं मिले लेकिन उनकी जीवंत मूर्ति के रूप में आचार्य विद्यासागर महाराज मिले जैसे भगवान को करते हैं वैसे ही स्मरण हम आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज को करे। राजस्थान का ऐसा पुण्य है जहां गुरुवर ने आकर दीक्षा ली।
महाराज श्री ने आगे कहा गुरुवर के संघ में सात साल साथ रहा उन्होंने उनके अंदर वात्सल्य तो इतना था कि घर में भी इतना वात्सल्य नहीं मिला गुरुवर की मुस्कान तो ऐसी थी कि एक बार गुरुवर मुस्कुरा दें तो हमें लगता था हमारा सब कुछ हो गया। गुरुवर ने जो दिया वो कभी किसी को नहीं मिला।
मंगल प्रवचन उपरांत आहारचर्या संपन्न हुई
परम पूज्य मुनिश्री 108 योग सागर जी महाराजको पडगाहन करके आहार देने का सौभाग्य बा ब्र. सरिता दीदी, रामबाबू जी, जंबू जी, पदम जी एवं कोटा वाला परिवार सांगोद को प्राप्त हुआ एवम मुनिश्री 108श्री निर्मोह सागर जी महाराज। को पडगाहन करके आहार देने का सौभाग्य पदम जी- राजेन्द्र जी -हुकम काका (अध्यक्ष चांदखेड़ी) -प्रकाश जी प्रतिक -दक्ष हरसोरा परिवार कोटा वालो को प्राप्तवालों को प्राप्त हुआ, मुनिश्री 108 श्री निरामय सागर जी महाराज_को पडगाहन करके आहार देने का सौभाग्य श्री सत्यनारायण जैन प्रशान्त जैन मीना जैन उषा जैन लीमी वाला परिवार चांदखेड़ी एवं ब्रह्मचारिणी रीता दीदी-ब्रह्मचारिणी अर्पणा दीदी श्री पारसमल -कान्ता जैन बहिपार्श्व नाथ वालों को प्राप्त हुए।_
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312




