परम पूज्य निर्यापक श्रमण मुनिश्री 108 अभयसागर महाराज

धर्म

परम पूज्य निर्यापक श्रमण मुनिश्री 108 अभयसागर महाराज 

प,पू आचार्यश्री 108 विद्यासागर महाराज जी पूज्य गुरुदेव के परम प्रभावक आज्ञानुवर्ती शिष्य परम पूज्य आठवें निर्यापक श्रमण मुनिश्री १०८ अभयसागर जी महाराजअभूतपूर्व प्रभावना कर रहे हैं मुनि श्री अभय सागर जी महाराज ने अपने गृहस्थ जीवन में अध्ययन अध्यापन के बाद पत्रकारिता को अपनाया था

 

 

,इसी श्रृंखला बस 10 फरवरी सन 1983 में ऐलक दीक्षा पाकर अपने आप को गुरु चरणों में समर्पित करने वाले साधक को 11 फरवरी 1998 बुधवार माघ शुक्ल 15 (पूर्णिमा) विक्रम संवत 2054 में मुनि दीक्षा प्राप्त हुई ।

 

आचार्य भगवंत की कृति मूकमाटी महाकाव्य को कई विश्वविद्यालयो में अध्ययन के लिए सामाहित कराये जाने में भी मुनि श्री के अथक श्रम को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।,मूक माटी जैसे महाकाव्य पर बहुत सारे शोधार्थियों ने phd भी की है जिनके मार्गदर्शक बनकर मुनि श्री ने उन्हें काफी मदद भी की है, हस्तलिखित ग्रंथों के रखरखाव के प्रति भी मुनि श्री की रूचि बहुत अधिक है कई सारे हस्तलिखित ग्रंथों की सूचियों को एकत्रित कर एक स्थान पर सूचिबृद्ध कराने में मुनि श्री अथक प्रयासरत हैं।

 

जबलपुर से रायपुर “”मूकमाटी एक्सप्रेस ट्रेन””🚊* के पीछे, कठोर मेहनत करने वाले साधक *पूज्य मुनिवर द्वारा अभियान सफल ही होता है। पर न कोई क्रेडिट लेने की इच्छा रखते, न आत्म प्रशंसा की चाह। केवल उद्देश्य पूर्ण की भावना*।

 

 

आज के इस शुभ अवसर पर पुज्य मुनिश्री जी के पावन चरणों में मेरी ओर से,एवं मेरे समस्त परिवारजनों की ओर से, बारम्बार नमोस्तु,नमोस्तु,हम सभी यही भावना भाते है कि मुनि श्री ऐसे ही अपनी साधना से अपना मोक्ष मार्ग प्रशस्त करे,जिनकी तप की चर्चा चारों ओर है,ऐसे ,भविष्य के महावीर को प्रणाम करता हूं।।

पूज्य गुरु चरणों में बारम्बार नमोस्तु,

   नमनकर्ता➖ *रीतेश,राजेश मिडला बीना*

 

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