जैन रत्न पदमश्री राजाराम जैन का निधन कौन थे पद्मश्री राजाराम जैन? 96 साल की उम्र में निधन, लिखी थीं 40 से ज्यादा किताबें
नोएडा के सेक्टर-34 में रहने वाले 96 वर्षीय पद्मश्री राजाराम जैन का रविवार को निधन हो गया। वे भारतीय वैज्ञानिक, भाषाविद् और लेखक थे। उन्होंने प्राचीन भाषाओं पर गहरा ज्ञान रखा।
राजाराम जैन न केवल भारतीय वैज्ञानिक थे, बल्कि भाषाविज्ञान के विशेषज्ञ, प्रसिद्ध लेखक तथा प्राकृत और अपभ्रंश जैसी प्राचीन भाषाओं के ज्ञाता भी थे। उनके निधन से साहित्यिक दुनिया में शोक की लहर दौड़ गई है। बेटी रत्ना जैन के मुताबिक, वर्ष 1929 में मध्य प्रदेश के मालथौन में जन्मे राजाराम जैन भाषाओं पर गहरी पकड़ रखते थे और दुर्लभ पांडुलिपियों का अध्ययन-अनुवाद करने में माहिर थे। इसी योगदान और प्राचीन भारतीय भाषाओं के ज्ञान के लिए उन्हें 2024 में पद्मश्री सम्मान मिला। साल 2000 में राष्ट्रपति पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। साल 2003 से वे नोएडा के सेक्टर-34 में परिवार के साथ रह रहे थे।






राजाराम जैन ने 40 से ज्यादा किताबें लिखीं। उन्होंने 14वीं-15वीं शताब्दी की अप्रकाशित पांडुलिपियां वर्षों तक जमा करने के बाद व्यवस्थित रूप से अध्ययन किया।
ये पांडुलिपियां तत्कालीन कवि रैधु की रचनाएं थीं। राजाराम जैन ने इनका हिंदी अनुवाद भी किया, जिससे साहित्य जगत को 14वीं शताब्दी की इन रचनाओं से संस्कृति और साहित्य को समझने का अवसर मिला। वे यूजीसी नेट तथा राष्ट्रपति पुरस्कार चयन समिति के सदस्य भी रहे। मार्च 2025 में उनकी पत्नी का निधन हो गया था, और शादी के बाद उन्होंने अपनी पत्नी को शिक्षा का अवसर प्रदान किया था।

