यह मेरे जीवन का बहुत बड़ा सौभाग्य है मुझे स्वर्णप्राशन पिलाने का सौभाग्य मिलाः- शिवराज सिंह चौहान
विदिशा
विदिशा में 16 संस्कारों से युक्त आयुर्वेद का प्रसिद्ध संस्कार “स्वर्ण प्राशन” जिसमें आचार्य गुरुदेव श्री विद्यासागर जी महामुनिराज का आशीर्वाद भी मिला हुआ है,उसकी शुरुआत भारत सरकार के कृषिमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विदिशा में विराजमान निर्यापक मुनि श्री संभवसागर महाराज, मुनि,श्री निस्सीम सागर महाराज, मुनि श्री संस्कार सागर महाराज के परम सानिध्य में उनके आशीर्वाद के साथ कार्यक्रम की शुरुआत बरो बाले बड़े बाबा एवं छोटे बाबा आचार्य गुरुदेव श्री विद्यासागर जी महामुनिराज एवं आचार्य श्री समयसागर महाराज के चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्वलन से की
समयाभाव सहित मुख्यअतिथि शिवराज सिंह चौहान ने सभी से विलंब के लिये क्षमा मांगी और कहा कि यह मेरे जीवन का बहुत बड़ा सौभाग्य है मुझे आपने उन नौनिहालों के लिये आयुर्वेद का स्वर्णप्राशन जिसमें आचार्य श्री विद्यासागरजी महामुनिराज का आशीर्वाद शामिल है वह उन सभी नौनिहालों का भविष्य उज्जवल करेगा उन्होंने सकल दि. जैन समाज के सभी पदाधिकारियों को धन्यवाद देते हुये कहा कि दूसरों की सेवा करना ही सबसे बड़ी सेवा है,उन्होंने मंचासीन सभी मुनिराजों से आशीर्वाद लेते हुये उनके चरणों का स्पर्श किया और कहा कि मेरे गुरुदेव आज भी मुझे याद है उनकी सजीव आंखे और उनका उठता हुआ हाथ उन्होंने कहा कि में सबसे ज्यादा भाग्यशाली हुं कि मुझे उनकी सेवा करने का सबसे ज्यादा अवसर मिला और इसी बहाने जब जब भी में उनके चरणों में पहुंचा सबसे ज्यादा आशीर्वाद भी मुझे मिला है।
उन्होंने कहा कि आप इन बच्चों की आज की चिंता नहीं भविष्य के लिये उनकी चिंता कर रहे है।मुनि श्री ने 2006 की स्मृतियों को ताजा करते हुये कहा कि कुंडलपुर में बड़े बाबा का गगन विहार आपके ही मुख्यमंत्रित्व काल में हुआ और मुझे याद है कि आपने अपनी कुर्सी की परवाह न करते हुये बड़े बाबा को नये आसन पर समस्त बाधाओं को दूर करते हुये विराजमान किया और छोटे बाबा आचार्य गुरुदेव के प्रति अपनी अनंत भक्ती और श्रद्धा प्रकट की मुनि श्री आचार्य श्री के प्रकल्पों जिसमें बेटी पढ़ाओ अभियान के अन्तर्गत प्रतिभा स्थलियो का निर्माण किया जिसमें आज पांच स्थानों पर लगभग 12 हजार के लगभग बेटियाँ संस्कार के साथ स्वालंबन तथा लौकिक शिक्षा के ग्रहण कर रही है उन्होंने स्मरण दिलाया और कहा आचार्य गुरुदेव ने 2014 में ही इसी विदिशा नगर से “इंडिया नही भारत कहो” का नारा दिया जिसे भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आत्मसात किया।


इस अवसर पर मुनि श्री निस्सीम सागर महाराज ने आचार्य गुरुदेव श्री विद्यासागर महाराज की जनकल्याण कारी नीतियों की चर्चा करते हुये स्वर्णप्राशन एक आयुर्वेद की दवा ही नही है यह गुरुदेव का आशीर्वाद है उन्होंने कहा कि यह गुरुदेव की दूरदर्शिता का ही परिणाम है कि भारत की प्रमुख जैलों में रह रहे कैदी आज हथकरधा को चलाकर न केवल अपने भविष्य को सुधार रहे है बल्कि उनको आत्मनिर्भर और सदाचारी बना रहे है जिनसे उनके मन में कभी अपराधी बनने का भाव ही न आये
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312




