हमारे लिए अपनी खुद की अहमियत पहचान चाहिए सफल व्यक्ति अपना लोहा मनवा लेता है– सुधासागर महाराज पंच कल्याणक महोत्सव की पत्रिका का हुआ विमोचन समन्वय ग्रुप घर घर जाकर दे रहा पंच कल्याणक के वस्त्र आभूषण
अशोकनगर –
-हमारे लिए अपनी खुद की अहमियत पहचान चाहिए तुम अपनी दृष्टि में क्या हो जब तक व्यक्ति अपना स्वयं का मूल्यांकन नहीं करता उसे अपनी अहमियत का एहसास ही नहीं होता आपकी कोई कद्र नहीं होगी दुनिया मेरी प्रतिभा का मूल्यांकन करें दुनिया मेरी लायकी को समझें दुनिया लायक को नालायक बनाने में लगी है किसी को नहीं पड़ी कि वह आपके लायकी का ढोल पीटे यहां तो लोग ना लगाने में लगे हैं लायक को भी नालायक बताते हुए नहीं चूकते तुम्हारे लिए अपनी लायकी दुनिया को बतानी होगी सफल भी वही होता है जो अपना मूल्यांकन स्वयं कर लेता है और दुनिया से अपना लोहा मनवा लेता है उक्त आश्य केउद्गार सुभाषगंज मैदान में विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि पुगंव राष्ट्रसंत श्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए।
पंचकल्याणक महोत्सव विश्वशांति महायज्ञ की पत्रिका का हुआ विमोचन
* श्री मद् जिनेन्द्र पंच कल्याणक महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ एवं गजरथ महोत्सव की मुख्य पत्रिका का विमोचन जैन समाज अध्यक्ष राकेश कासंल उपाध्यक्ष अजित वरोदिया प्रदीप तारई राजेन्द्र अमन महामंत्री राकेश अमरोद कोषाध्यक्ष सुनील अखाई मंत्री शैलेन्द्र श्रागर मंत्री विजय धुर्रा मंत्री संजीव भारिल्य मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार आडिटर संजय के टी संयोजक मनोज रन्नौद उमेश सिघई मनीष सिंघई श्रेयांसघैला थूवोनजी अध्यक्ष अशोकजैन टींगूमिल महामंत्री मनोज भैसरवास विपिन सिंघई समन्वय ग्रुप के साथियों सहित अन्य प्रमुख जनो द्वारा किया गया।

महोत्सव के आभूषण धोती दुपट्टा सहित अन्य आभूषण समन्वय ग्रुप के सभी सदस्यों घर घर पहुंच कर देने का संकल्प लेकर परम पूज्य से आशीर्वाद प्राप्त किया 

ऊंची दुकान और फीके पकवान जैसी स्थिति से बचकर रहें
उन्होंने कहा कि दुनिया मेरी जिंदगी का मूल्यांकन करें मैं बहुत मूल्यवान वस्तु हूं जब कोई तुम्हे मूल्यवान कहता है तो ऐसा ना हो कि तुम्हें मूल्यांकन समझाकर तुम्हारे यहां कोई आये ही ना इसलिए आचार्य श्री कुन्द कुन्द स्वामी ने कहा कि जहां उन्होंने कहा था कि तू भगवान चेतन्य घन स्वरूप आत्मा हूं ऐसा सुनकर लोगो ने आपकी दुकान पर आना ही बंद कर दिया अपनी वस्तु की कीमत घोषित करने के पहले जरा बाजार के भाव को देख तुम अपने आप को भगवान घोषित कर रहे हो जरा अपने आप को देखो पहले भगवान का स्वरूप देखो भगवान के लक्षण देखो ऊंची दुकान और फीके पकवान जैसी स्थिति नहीं बनाना हमारे पास राग द्वेष बहुत है यदि तुम्हारे पास राग द्वेष की एक भी कड़िका है तो तुम अपने आप को प्रभु के समकक्ष नहीं हो सकते मार्ग तो यही है यही से चल कर आप भगवान बन सकते हैं लेकिन इसके लिए आपको आप को झोंकना होगा।
संसार में तुम्हें कोई छोड़ना नहीं चाहता
उन्होंने कहा कि संसार में तुम्हें कोई छोड़ना नहीं चाहता आप अपने बेटे को थोड़ी सी छूट दे दी और यदि उसने छूट का फायदा उठाकर जो तुम्हारे लिए जो नहीं करना था वह कर दिया कभी बड़ों की छूट से किमिछिक दान लेना नहीं और पिता का कर्त्तव्य है कि वह अपने बेटे को पतन की ओर ना धकेलें सही मार्ग तो है कि पिता बेटे को सही राह दिखायें कुछ बेटे ऐसे भी होते हैं जिनकी पहचान बेटों से होती है आज ये मंच पर बैठे हैं ऐलक जी महाराज आपको देखकर कैसा लग रहा है हम ख़ुद घर से भाग कर आए आप ही बताइए भइया आपको कैसा लग रहा है यही तो वह बात है कि दुनिया यहां दीवानी हो कर आती है और खुशी खुशी जाती है।
बड़े तुम्हारी प्रशंसा करेंगे आपको प्रशंसा से दूर रहना है
उन्होंने कहा कि बड़े तुम्हारी प्रशंसा करेंगे आपको प्रशंसा में नहीं पड़ना है यदि आप अपनी प्रशंसा सुनकर छोटे आदमी थोड़ी प्रशंसा सुनकर भूलकर कूप्पा हो जाये तो समझ लेना अब आपका विकास रूक गया सारी दुनिया आपकी प्रशंसा करें तो फूल जाना यदि बड़े आपकी प्रशंसा करें तो आप अपनी नजर नीची कर लेना एक विद्वान के चार बेटे थे सुंदर गुणवान सुशील थे लेकिन तोतली बोली थी उनके विवाह नहीं हो रहे थे उनके पिता ने विवाह प्रस्ताव लेकर आने वालो के सामने मौन रहने को कहा लेकिन प्रशंसा सुनकर वह बोल पड़े हम विफल क्यों होते हैं उसमें सबसे बड़ी बात हमें अपनी प्रशंसा सुनकर भूलकर मद मस्त नहीं होना है अपने मन में प्रशसा का भाव आता है यही से आपकी प्रगति रूक जाती है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312


