जैन संत बिरले संत मुनिश्री जय कीर्ति महाराज ऐसे संत हैं जिन्होंने कोरोना जैसे भीषण काल में गजपंथा पहाड़ की 251 वंदना की

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जैन संत बिरले संत मुनिश्री जय कीर्ति महाराज ऐसे संत हैं जिन्होंने कोरोना जैसे भीषण काल में गजपंथा पहाड़ की 251 वंदना की

 

वर्तमान के इस भौतिक एवं सांसारिक सुख सुविधाओं से युक्त जीवन में दिगंबरत्व धारण कर जैन मुनि की साधना का पालन करना अपने आप में एक कठिन तपस्या हैं, और ऐसी कठिन तप साधना को पालन करते हुए जब कोई संत साधना की उत्कृष्ट सीमा को प्राप्त करता है तो ऐसे काम बिरले जैन संत ही कर सकते हैं।

 

 

 

 

वर्तमान में कोटा में ध्यान दिवाकर मुनि प्रवर अनुष्ठान विशेषज्ञ जैन राम कथाकार श्री जय कीर्ति जी गुरुदेव विराजमान है। आपने 22 वर्ष पूर्व इस संसार को व्यर्थ जानकर त्याग कर दिया और संयम के पद को चुना और आचार्य देव नंदी जी गुरुदेव से आपने ऐलक एवं तत्पश्चात मुनि दीक्षा ग्रहण की। वर्तमान परिस्थितियों में भी आपने उत्कृष्ट एवं कठिन तप साधना की है जिसके कुछ उदाहरण आपके समक्ष हैं ।

 

 

 

 

कोरोना काल जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों में भी आपने गजपंथा में चातुर्मास करते हुए पहाड़ की 251 वंदना की जो की वहाँ की समिति के अनुसार अपने आप मे कीर्तिमान है।

 

 

 

अखण्ड आराधना- कचनेर 

चिंतामणि पारसनाथ अतिशय क्षेत्र पर महाराज जी द्वारा 75 दिवसीय अखंड इष्टसिद्धि मौन आराधना कर तप साधना की।

 

 

 

 

सम्मेद शिखर जी पर्वत पर तपसाधना-

 पूज्य महाराज जी पर्वतराज श्री सम्मेदशिखर जी पर लगातार 1 वर्ष 16 दिन(381 दिन) तक पर्वत पर रह कर प्रतिकूल मौसम में भी 261 वंदना की साथ ही प्रत्येक टोंक पर 108 परिक्रमा एवं सिद्धचक्र विधान तथा पारसनाथ टोंक पर व्रहद सिद्ध चक्र महामण्डल विधान संपादित किया जो कि अपने आप मे एक कीर्तिमान है।

 

 

 

 

महातीर्थ से महातीर्थ की वंदना- पूज्य गुरुदेव द्वारा श्री सम्मेदशिखर महातीर्थ से बद्रीनाथ जी महातीर्थ की 3000 KM की अनवरत यात्रा महज 5 माह में पूर्ण की ओर बद्रीनाथ के विषम प्रतिकूल वातावरण में भी 14 दिन का प्रवास किया और वहा पर सिद्ध चक्र महामण्डल विधान सम्पन्न किया।साथ ही बद्रीनाथ से 5 km ऊपर स्थित नीलकंठ ग्लेशियर तक बर्फ की चादर पर विहार कर कीर्तिमान बनाया।

 

 

 

महावीरजी में साधना-

 गत चातुर्मास में गरूदेव द्वारा श्री महावीर जी मे भी कठिन साधना व अनुष्ठान संपन्न किये आप प्रतिदिन मूलनायक श्री महावीर भगवान की प्रतिमा जी के समक्ष 3 घण्टे तक बिना हिले ढूंले साधना करते थे।

 

 

 

 

आने वाले वर्षों में गरूदेव द्वारा 2026 से 2034 तक 8 वर्षो तक नंदीश्वर व्रतों की साधना करते हुए 8 वर्ष तक तीनो अष्ठानिका पर्वो में श्री सिद्धचक्र महामण्डल विधान की आराधना करने के भाव है। निश्चित रूप से इस काल मे हमारा सौभाग्य है कि हम सब इस तप साधना के साक्षी बने है।

 

 

 

 

अनुष्ठान विशेषज्ञ-

 आपके द्वारा आगम सम्मत विधी अनुसार विभिन्न व्याधि बाधि निवारक अनुष्ठान सम्पन्न कराने में विशेषज्ञता है।

 

 

 

आप पद्मपुराण आधारित जैन रामकथा वाचन में विश्व प्रसिद्ध है।आपके द्वारा पुराणों में रिसर्च कर उन्हें जीवंत करते हुए बेहतरीन स्क्रिप्ट सहित मधुर संगीत की लहरियों से विभिन्न मनोभावों से रामकथा का वाचन विगत कई वर्षों से किया जा रहा है ओर आप इसमें सर्व निपुण है

 

        कोटा का सौभाग्य

  कोटा वासी यह कहते हैं कि 

 ये हम कोटा वासियो का परम सौभाग्य है कि ऐसे संत हमारे बीच विराजमान है और सोने पे सुहागा है कि गुरुवर द्वारा कोटा में कोटा की ह्र्दयस्थली रामपुरा में प्राचीनतम मन्दिरो के मध्य जैन रामकथा का भव्य वाचन का आयोजन किया जा रहा है। आप सभी समाज जनों से निवेदन है कि इस कथा के कार्यक्रम में तन मन धन का सदुपयोग कर गुरुवाणी का श्रवण कर स्वयं को कृतार्थ करे व आयोजन को सफल बनाए।

 

   गुरु भक्त से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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