जैन शाकाहार की जीवनशैली को मान्यता दे रही दुनिया : उपराष्ट्रपति
नई दिल्ली
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने शनिवार को कहा कि जैन जीवनशैली में शाकाहार को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का आदर्श माना जाता है। और वह दो दशकों से अधिक समयपहले शाकाहारी हो गये थे।
जैन आचार्य हंसरन सुरीश्वर के 8वें 180 ‘उपवास पारणा’समारोह के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति ने कहा कि जैन धार्मिक गुरुओं द्वारा प्रचारित अहिंसा ही विश्व शांति का मार्ग है।


पहले मुझे मांसाहारी भोजन पसंद था लेकिन 2000 में काशी की यात्रा के बाद उन्होंने इसे छोड़ दिया। उन्होंने बताया कि गंगा में पवित्र स्नान करने से पहले किसी प्रिय चीज का त्याग़करने की परंपरा के अनुसार उन्होंने मांसाहारी भोजन छोड़ दिया उन्होंने कहा, जब आप मांसाहार भोजन करते हैं, तो अनुभव अलग़ होता है। जब आप शाकाहार भोजन करते हैं, तो आपकामानसिक दृष्टिकोण पूरी तरह बदल जाता हैयही मेरा अनुभव है।
राधाकृष्णन ने कहा, जैन जीवनशैली में शाकाहार, पशुओं के प्रति करुणा और सतत जीवन जीनेकी आदत को पूरी दुनिया में
पर्यावरणीय जिम्मेदारी का आदर्श माना जाता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312





