आरोन में जैन साधिका मां स्वर्ण श्री का हुआ सल्लेखना पूर्वक समाधि मरण
आरोन।
नगर के आचार्य श्री विद्यासागर साधिका आश्रम में विगत तीन वर्ष से साधनारत 10 प्रतिमाधारी श्रेष्ठ साधिका मां स्वर्णश्री (गृहस्थ जीवन का नाम सोना देवी जैन) की बीजाक्षर प्रणेता मुनिश्री दुर्लभसागर जी महाराज एवं छुल्लक निर्धूमसागर जी महाराज के सानिध्य में विगत समय से सल्लेखना साधना चल रही थी। शनिवार रात्रि में उनकर समाधि मरण हो गया।
चातुर्मास कमेटी के प्रचार मंत्री सुनील झंडा ने जानकारी देते हुए बताया कि राजनांदगांव छत्तीसगढ़ निवासी घमसैया परिवार की सोना देवी जैन धर्म पत्नि एडवोकेट स्व.श्री निर्मलचंद जैन जोकि पूर्व में आर्यिका श्री आदर्शमति माताजी के संघ में रहकर साधनारत थी एवं बाद में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज द्वारा आरोन में साधिका आश्रम प्रारंभ कराने के बाद वह तीन वर्ष से आरोन के साधिका आश्रम में साधना कर रही थीं।
रविवार को सुबह श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर की धर्मशाला साधिका आश्रम से उनकी अंतिम डोला यात्रा निकाली गई। इस अंतिम डोला यात्रा में आरोन जैन समाज के सभी महिला पुरुष उनके गृहस्थ जीवन के परिवार जन शामिल हुए और सभी ने साधिका मां स्वर्ण श्री के उत्कृष्ट समाधि मरण सल्लेखना की मंगल अनुमोदना की।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
