नगर में चातुर्मासरत युगल मुनिराज का हुवा नगर से मंगल विहार ।सभी समाजजनों ने नम आखों से प्रकट की भावांजली।
सनावद :–सनावद नगर में पिछले 4 माह से अपनी ओजस्वी वाणी से सभी को रसपान करवाने वाले युगल मुनिराज मुनि श्री विश्व सूर्य सागर जी महाराजएवं मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज का मंगल विहार नेमावर की ओर हुवा।
सन्मति जैन काका ने बताया की युगल मुनिराज पिछले 4 माह से नगर में श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर में विराजमान हो कर धर्म की प्रभावना कर रहे थे ।आप के सानिध्य में आप ने निरंतर ध्यान स्वाध्याय करवाया आप के द्वारा निरंतर धर्म की प्रभावना की जा रही थी। आप सनावद से नेमावर की ओर विहार करेगे। आप के विहार के पूर्व सभा का शुभारम श्रुति सराफ एवं वर्षा जैन ने मंगलाचरण से की सभा में संबोधित करते हुवे मुनि श्री विश्वसूर्य जी महाराज ने कहा की जिसके जीवन में गुरु नहीं ऊसका जीवन शुरू नहीं ,हमारा सौभाग्य हे की हमे आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज सहित 18 त्यागियों की नगरी सनावद में हमे 4 माह का साधना करने का शोभाय मिला। हमारे द्वारा जो भी ज्ञान की बाते आप को बताई आप उस पर जरूर अमल करेंगे उन्हें अपने जीवन में उतारेंगे आप ने जिस प्रकार 4 माह तक प्रतिदिन सब ने मिलकर स्वाध्याय किया है आशा करते हे आप आगे भी इसी तरह सभी मिलकर यह स्वाध्याय निरंतर जारी रखेंगे । इसी क्रम में मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज ने अपने वाणी का रसपान करवाते हुवे कहा की साधु नदी में बहता हुवा पानी है जो निरंतर बहता रहता हे। चलता रहता हे सनावद में चतुर्मास करना हमारे जीवन का अभी तक सार्थक एवं यादगार चातुर्मास रहा। साधु तो सिर्फ़ आप के मन के मेल को धोने आते हे हम तो सिर्फ एक निमित्य होते हे ।हम तो सिर्फ ज्ञान देने आए थे आप ने जो भी हमारे से ज्ञान अर्जित किया आप निरंत उसे यूंही आगे भी भुना पायेंगे।
इस अवसर पर युगल मुनिराज के प्रति अपनी नम आंखों से अपनी बात मंजुला भूच, राहुल स्वास्तिक, पवन गोधा, रेखा राकेश जैन,प्रशांत जैन ने भी युगल मुनिराज के प्रति अपनी सच्ची भावांजलि प्रकट की।
इस अवसर पर सभी समाजजन उपस्थित थे।
