साधु की खुली आंखें आपके कल्याण के लिए है–सुधासागरजी महाराज
जबलपुर
तुम्हारे लिए मेरी खुली आंख कल्याण कारी है, या बन्द आंख। साधु की आंख खुली है तो वह आपके कल्याण की ही कामना करता है। शिष्य को जितनी डांट पड़ेगी, उतना शिष्य में निखार आयेगा। जिसको गुरु की डांट पड़ेगी उस भक्त का कल्याण होगा।लेकिन नकली शिष्य होगा तो भाग जायेंगे। अगर असली शिष्य होगा तो समर्पित हो जायेगा।
ये पंचकल्याणक भक्तों के कल्याण के लिए ही है। जैसे आप लोग कहते हैं कि महाराज जी ये दुकान आपकी है। ये मकान आपका है। फैक्टरी आपकी है। अपने भक्तों के कल्याण का यह पंचकल्याणक है। हमारे उद्धार के लिए है। हम सुधरेंगे हम सब लाभान्वित होंगे। आदिनाथ का पंचकल्याणक तो हो चुका है। ये आपके लिए ही महा महोत्सव हो रहा है।

उक्त आश्य के उद्गार शासनोदय तीर्थ जबलपुर से सीधे प्रसारण में धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए
सभ्यता खंडित नहीं होना चाहिये
उन्होंने कहा कि भगवान,धर्म गुरु के एक बार मुनीम बन जाओ, तो भव भव मे सेठ बनते रहोगे। अपना धन भगवान गुरू के चरणों में चढा दो। धन का सदुपयोग होगा,डाकु से कभी मत भिड़ना क्यों कि डाकु मार भी सकता है। इसलिए अपनी जान बचाने के लिए तिजोरी की चाबी दे देनी चाहिये यें सभ्यता व्यवहार हैं।
सत्य खंडित हो जाये तो हमें कोई नुकसान नही, सभ्यता खंडित नहीं होना चाहिये। सत्य से संसार नहीं चलने वाला। दुनिया में जीने के लिए सत्य नहीं चाहिए,सभ्यता नैतिकता चाहिए। सत्यवान संसार में कभी जी नहीं सकता।
बहुत सी बातें आंखों देखी भी सत्य नहीं होती
मुनिश्री ने कहा कि हमारे कदम क्यो भटक जाते है,जब हम रास्ते सही समझकर चल रहे फिर क्यो गलती हो रही है, क्योंकी जिंदगी में डर बना रहता है। क्योंकी अपनो से भी डर लगने लगता है। अपने घर में ही डर लगने लगता है।बंद कमरे में अकेले है, तब डर लगने लगता है। जो मेरा मन सोचे वही सत्य है। यही चमत्कार है। जो सत्य वो सोचे यह कोई चमत्कार नहीं है। मेरे मन मे जो विचार उठते हे ये सत्य ही है। मेरे मन में जो आये वही सत्य हैं।कितनी बाते हमारी आँखों से देखी सत्य निकलती है। बहुत सी बातें आखों देखी भी सत्य नहीं निकलती है। केवली भगवान के सामने कभी चमत्कार नहीं होता है, जो सत्य होता है वहीं केवली भगवान कहते हैं।
संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमंडी
